जयपुर। राजस्थान में आगामी ‘जनगणना 2027’ की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार को लोक भवन में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे द्वारा स्व-गणना प्रक्रिया के साथ की गई। इस पहल के साथ ही राज्यभर में जनगणना गतिविधियों का प्रथम चरण शुरू हो गया है, जिसमें नागरिकों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है।
राज्यपाल ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के विकास की आधारशिला है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे स्व-गणना के जरिए अपनी और अपने परिवार की सही व पूरी जानकारी दर्ज करें, ताकि नीतियों और योजनाओं का निर्माण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
जनगणना पोर्टल बेहद सरल
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा तैयार किया गया वेब पोर्टल बेहद सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल है, जिससे लोग आसानी से अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं।
गणनाकर्मियों का सहयोग करने की अपील
उन्होंने युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से भी आगे आकर लोगों को डिजिटल माध्यम से जुड़ने में मदद करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि तकनीकी जानकारी के अभाव में कोई भी व्यक्ति इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से वंचित नहीं रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने नागरिकों से गणनाकर्मियों का सहयोग करने, सही जानकारी देने और किसी भी शंका की स्थिति में हेल्पलाइन का उपयोग करने की सलाह दी।
पहली बार हो रही डिजिटल जनगणना
यह जनगणना खास इसलिए भी है क्योंकि इसे देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसमें आंकड़ों का संग्रह आधुनिक डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सटीक बन सके।
1 मई से 15 मई तक स्वगणना का मौका
जनगणना निदेशक विष्णु चरण मलिक ने जानकारी दी कि घर-घर सर्वेक्षण से पहले नागरिकों को 1 मई से 15 मई 2026 तक स्व-गणना का अवसर दिया गया है। इस दौरान लोग आधिकारिक पोर्टल (https://se.census.gov.in) पर अपने मोबाइल नंबर के जरिए लॉग इन कर आवश्यक जानकारी भर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी भी मौजूद रहे।