लेबर से टीचरः दिन में मजदूरी और रात में पढ़ाई, उधार लेकर पहुंचा परीक्षा केंद्र, परिणाम आते ही छलके आंसू

Success Story: मेहनत कर सफलता पाने की बहुत सी कहानियां आपने पढ़ी और सुनी होंगी, लेकिन यकीन करें ये सबसे अलग है। दरअसल आज मजदूर दिवस है और इस मौके पर आपको सफलता की ऐसी कहानी बताते हैं जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देगी। किस तरह से एक लेबर ने सरकारी शिक्षक बनने का सफर पूरा किया और वह भी बेहद ही कठिन हालात में। परीक्षा देने जाने के लिए तक उसने अपने दोस्तों से रुपया उधार लिया, लेकिन जब परिणाम आया तो सभी की आंखे खुशी से नम थी। बाड़मेर जिले के बायतु कस्बे के एक गांव में रहने वाले रेखाराम मेघवाल ने मेहनत कर अपना जीवन बदला है।

कच्चा मकान, रहने-खाने तक की परेशानी, लेकिन धैर्य नहीं खोया

दरसल बायतु कस्बे के एक गांव में रहने वाले रेखाराम मेघवाल पेशे से श्रमिक थे। वे पिछले कई सालों तक बाड़मेर और आसपास के इलाकों में ही ईंट और सीमेंट ढोने का काम करते थे। पढ़ाई में बचपन से तेज थे लेकिन मौके नहीं मिले। दोस्त बोलते थे कि रेखाराम तू बड़ा आदमी बनेगा। दोस्तों के कहने पर शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षाएं देना शुरू किया । दिन में मेहनत और मजदूरी करते और रात में नोट्स बनाते, याद करते और पढ़ाई करते। उसके बाद तीन साल पहले रीट लेवल दो में विज्ञान और गणित की परीक्षा में पास हो गए। मजदूर से टीचर बनने की इस सफलता की कहानी को सबसे पहले धौलपुर पुलिस ने सोशल मीडिया पर साझा किया और उसके बाद रेखाराम वायरल हो गए।

जिस दिन परिणाम आया सीमेंट के बोरे खाली कर रहे थे रेखाराम

मजदूर से टीचर तक के सफर में रेखाराम ने काफी मेहनत की। परीक्षा सेंटर तक जाने के लिए उनके पास पैसा नहीं था, तो दोस्तों ने उधार दिया। उसके बाद परीक्षा दी। परीक्षा देने के बाद फिर से मजदूरी पर आ गए। कुछ महीनों के बाद जब परिणाम आया तो उस समय सीमेंट के ट्रक में से बोरे खाली कर रहे थे। दोस्तों ने बताया तू पास हो गया तो उसे मजाक लगा, बाद में जब परिणाम दिखाया तो सभी की आंखे खुशी के आंसू से नम हो गई थीं। फिलहाल वे सरकारी शिक्षक हैं।