राजस्थान में सूर्यदेव के तल्ख तेवरों और भीषण गर्मी ने शिक्षा विभाग को बड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने छात्र हित में आदेश जारी करते हुए अब स्कूलों के संचालन का जिम्मा जिला कलेक्टरों को सौंप दिया है। नए आदेश के अनुसार राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के समय में बदलाव करने या स्थिति गंभीर होने पर अवकाश घोषित करने का अंतिम अधिकार संबंधित जिला कलेक्टर के पास होगा। निदेशालय का यह फैसला बढ़ते तापमान और लू से बच्चों को बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
16 मई तक कलेक्टरों के पास रहेगा ‘कमांड कंट्रोल’
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक स्थानीय परिस्थितियों और मौसम की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर अपने विवेक से निर्णय ले सकेंगे। यह विशेष व्यवस्था ग्रीष्मावकाश शुरू होने से ठीक पहले, यानी 16 मई 2026 तक प्रभावी रहेगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कलेक्टर अपने जिले के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करेंगे और मौसम विभाग की चेतावनियों के आधार पर स्कूल समय में कटौती या छुट्टी का आदेश जारी करेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे और बच्चों को भीषण दोपहर में घर लौटने की समस्या से निजात मिलेगी।
निदेशालय का ‘लेट’ आदेश, कई जिलों में पहले ही बदला समय
शिक्षा निदेशालय का यह आधिकारिक आदेश थोड़ा देरी से आया है। निदेशालय के इस फैसले से पहले ही प्रदेश के कई जागरूक जिला कलेक्टरों ने अपने स्तर पर स्कूलों के समय में परिवर्तन कर दिया था। पश्चिमी राजस्थान और शेखावाटी अंचल में पारा 44 डिग्री के पार जाने के कारण स्थानीय प्रशासन पहले से ही सक्रिय हो गया था। अब निदेशालय की मुहर लगने के बाद इन आदेशों को कानूनी मजबूती मिल गई है। विभाग ने साफ किया है कि प्राथमिक उद्देश्य केवल विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि तेज धूप के कारण बच्चे बीमार न पड़े।
बीकानेर-गंगानगर में सुबह की पारी, 11:30 बजे तक छुट्टी
प्रदेश के कई जिलों में स्कूलों का नया टाइम-टेबल लागू हो चुका है। बीकानेर कलेक्टर निशांत जैन ने जिले के स्कूलों का समय बदलकर सुबह 7:30 से 11:30 बजे तक कर दिया है। इसी तरह श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, चूरू और बाड़मेर जैसे गर्म जिलों में भी स्कूलों की छुट्टी दोपहर 12 बजे से पहले की जा रही है। जयपुर और आसपास के इलाकों में भी कलेक्टर जल्द ही नई गाइडलाइन जारी कर सकते हैं। अब माना जा रहा है कि जिन जिलों में पारा 45 डिग्री के करीब है, वहां कलेक्टर जल्द ही छोटे बच्चों के लिए पूर्ण अवकाश की घोषणा भी कर सकते हैं।