Bomb Threat in Rajasthan : राजस्थान में ‘मज़ाक’ बनीं बम की धमकियां, विधानसभा को उड़ाने की तीसरी धमकी, आखिर क्यों पकड़ से दूर हैं दहशतगर्द?

राजस्थान की लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत यानी ‘विधानसभा भवन’ को एक बार फिर निशाना बनाने की धमकी मिली है। सोमवार को विधानसभा दफ्तर के आधिकारिक ई-मेल पर एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी। ई-मेल में दावा किया गया कि दोपहर 12 बजे विधानसभा परिसर में ‘सिलिकॉन और RDX’ बम ब्लास्ट होंगे।

सबसे हैरानी की बात ये है कि यह एक महीने के भीतर तीसरी बार है जब इस बेहद सुरक्षित इमारत को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। ई-मेल मिलते ही पुलिस का भारी जाब्ता, बम निरोधक दस्ता (BDDS) और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुँच गए और पूरे परिसर को खाली करवाकर घेराबंदी कर दी गई।

सिलिकॉन और RDX का खौफ: क्या था ई-मेल में?

Rajasthan Vidhan Sabha Security

धमकी भरे ई-मेल में बहुत ही डरावनी भाषा का इस्तेमाल किया गया।

नियत समय: ई-मेल में ठीक 12 बजे धमाके की बात कही गई।

विस्फोटक का नाम: धमकी में ‘सिलिकॉन’ और ‘RDX’ जैसे घातक विस्फोटकों का जिक्र किया गया, ताकि सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीरता से लें।

तत्काल एक्शन: एहतियात के तौर पर कर्मचारियों को भवन के बाहर ही रोक दिया गया और भीतर मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।

सिर्फ विधानसभा नहीं, निशाने पर रही है पूरी राजधानी

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जयपुर में बम की धमकियों का यह सिलसिला नया नहीं है। पिछले कुछ दिनों में दहशतगर्दों ने राजस्थान के महत्वपूर्ण संस्थानों को ईमेल के जरिए ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाया है:

राजस्थान हाई कोर्ट: न्याय के मंदिर को भी बम से उड़ाने की धमकी दी जा चुकी है।

SMS स्टेडियम: खेल प्रेमियों के गढ़ को भी निशाना बनाने का दावा किया गया।

निजी स्कूल: मासूम बच्चों के स्कूलों को ईमेल भेजकर दहशत फैलाई गई।

चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक की सभी धमकियां फर्जी (Hoax Calls/Emails) साबित हुई हैं, लेकिन इसने पुलिस और प्रशासन की ऊर्जा और सरकारी संसाधनों को बुरी तरह बर्बाद किया है।

बड़ा सवाल: आखिर पकड़ में क्यों नहीं आ रहे दहशतगर्द?

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बार-बार मिल रही धमकियों ने राजस्थान पुलिस के साइबर सेल और सुरक्षा तंत्र की ‘टॉपिकल अथॉरिटी’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं:

VPN और डार्क वेब का खेल: शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये ईमेल अक्सर विदेशी सर्वर या VPN के जरिए भेजे जाते हैं, जिससे सेंडर की लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है।

मजाक या साजिश? क्या यह किसी सिरफिरे का मजाक है या फिर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को परखने की कोई बड़ी साजिश? पुलिस अब इस पैटर्न की जांच कर रही है।

संसाधनों की बर्बादी: हर बार धमकी मिलने पर हजारों पुलिसकर्मियों और तकनीकी विशेषज्ञों की ड्यूटी लगती है, जिससे करोड़ों रुपये का सरकारी धन और समय बेवजह बर्बाद हो रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों का जवाब

जयपुर पुलिस का कहना है कि वे हर धमकी को गंभीरता से लेते हैं। हालांकि अब तक कुछ नहीं मिला है, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार सर्च ऑपरेशन अनिवार्य है। साइबर टीम ईमेल के हेडर और आईपी एड्रेस को डिकोड करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ले रही है।