हनुमानगढ़। नशे में इस्तेमाल होने वाली दवा की तस्करी के मामले में पुलिस जांच के दौरान नशे के नेटवर्क की कई परतें खुलकर सामने आई हैं। 2800 प्रीगेलालिन कैप्सूल बरामद होने के बाद गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में ऐसे खुलासे हुए हैं, जिनके बाद जिला कारागार में तैनात एक पुलिसकर्मी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। पुलिस अब पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
डीएसटी के सहयोग से जंक्शन पुलिस ने नशा तस्करी की रोकथाम को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए गैर एनडीपीएस घटक की प्रतिबंधित श्रेणी के 2800 प्रीगेलालिन कैप्सूल बरामद किए थे। इस मामले में आरोपी अजय कुंअर (22) पुत्र इंदरजीत, जाति अरोड़ा, निवासी वार्ड छह, वन विभाग के पास पीलीबंगा हाल निवासी 9/25 मलकीतसिंह मान हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, जंक्शन को गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ 223-बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।
यूं आया मामला सामने
पुलिस सूत्रों के अनुसार डीएसटी ने आरोपी अजय को पकड़कर उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया था। इसी दौरान उसके मोबाइल पर एक कॉल आया। फोन करने वाले ने आरोपी को चेतावनी देते हुए कहा कि डीएसटी सक्रिय है और कार्रवाई कर सकती है, इसलिए बचकर रहना। जब डीएसटी ने आरोपी से फोन करने वाले के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कॉल जिला कारागार में बंद एक बंदी का था, जिसे वह पहले भी नशे में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की सप्लाई कर चुका है।
इसके बाद डीएसटी टीम हनुमानगढ़ जिला कारागार पहुंची। वहां पहुंचने पर संदिग्ध बंदी ने अपना मोबाइल फोन नष्ट कर दिया। पुलिस की कड़ी पूछताछ में बंदी ने बताया कि उसे जिला कारागार में तैनात एक पुलिसकर्मी ने सूचना दी थी कि डीएसटी नशीली दवा तस्करी के मामले में कार्रवाई को लेकर सक्रिय है। इस खुलासे के बाद संबंधित पुलिसकर्मी की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
एसपी ने जांच के निर्देश दिए
जिला पुलिस अधीक्षक नरेन्द्रसिंह मीणा ने बताया कि नशे में इस्तेमाल होने वाली दवा की तस्करी के मामले में संदिग्ध भूमिका सामने आने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।