Mock Drill: जयपुर के हवामहल में अचानक घुसे ATS के हथियारबंद कमांडो- चारों तरफ से घेरा, देखें लाइव एक्शन का पूरा सच!

देशी-विदेशी पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले जयपुर स्थित ऐतिहासिक हवामहल स्मारक पर बुधवार का नज़ारा बेहद ख़ास था। दरअसल, यहां अत्याधुनिक हथियारों से लैस एटीएस (Anti-Terrorism Squad) के जांबाज जवान पोजिशन लिए खड़े दिखाई दिए। एकबारगी तो वहां से गुजरने वाले जयपुर वासियों और विदेशी सैलानियों के सांसें थम गईं कि आखिर इतने बड़े इंटरनेशनल टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर क्या कोई बड़ी अनहोनी हो गई है? लेकिन कुछ ही मिनटों में जब लाउडस्पीकर से घोषणा हुई, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। यह कोई हमला नहीं बल्कि जयपुर को सुरक्षित रखने की दिशा में एटीएस का एक बेहद ही सीक्रेट और प्लान्ड सुरक्षा ऑपरेशन था।

कमान संभालते ही कमांडो ने लिया पोजीशन

एटीएस (ATS) की चौथी ईआरटी (Emergency Response Team) के जवानों ने इस मॉक ड्रिल को इस तरह अंजाम दिया जैसे सचमुच हवामहल के भीतर कोई सुरक्षा संकट खड़ा हो गया हो।

पूरे ऑपरेशन की टाइमलाइन और रणनीतिक कदम कुछ इस प्रकार थे:

त्वरित घेराबंदी (Tactical Cordone): कमांडो की गाड़ियों ने अचानक हवामहल के मुख्य प्रवेश द्वार और निकास द्वारों को अपने नियंत्रण में ले लिया।

पोजीशन लॉक: महज कुछ सेकेंड्स के भीतर हथियारबंद जवान हवामहल के विभिन्न तलों और झरोखों की तरफ दौड़ पड़े और पूरे स्मारक को एक अभूतपूर्व सुरक्षा घेरे में ले लिया।

इस पूरे अभ्यास को एटीएस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) राजेंद्र सिंह और हवामहल स्मारक की अधीक्षक सरोजनी चंचलानी की सीधी देखरेख में संचालित किया गया, ताकि स्मारक की ऐतिहासिक बनावट को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षा मानकों को परखा जा सके।

Jaipur Hawa Mahal ATS Mock Drill

जांबाजों ने दिखाया लाइव ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’

इस हाई-वोल्टेज मॉक ड्रिल का असली रोमांच तब देखने को मिला जब टीम कमांडर दिनेश कुमार मीणा और सीएचएम (CHM) मुकेश सैनी के ऑन-ग्राउंड निर्देशन में जवानों ने ‘इमरजेंसी इवेकुएशन’ और ‘काउंटर टेरर’ की रणनीति का प्रदर्शन किया।

शून्य प्रतिक्रिया समय (Zero Response Time): जैसे ही टीम को आपातकालीन अलार्म मिला, पूरी तरह से स्वचालित राइफलों और नाइट विजन गियर्स से लैस जवानों ने महल के संकरे रास्तों और सीढ़ियों के बीच से तेजी से ऊपर चढ़ने का अभ्यास किया।

पर्यटक रेस्क्यू ड्रिल: इस दौरान यदि कोई संकट खड़ा होता है, तो हवामहल के ऊपरी मंजिलों (जैसे हवा मंदिर या प्रकाश मंदिर) में फंसे पर्यटकों को बिना किसी पैनिक के सुरक्षित नीचे कैसे लाया जाए, इसका एक लाइव डेमो दिया गया।

क्यों चुना गया जयपुर का हवामहल?

जयपुर का परकोटा इलाका और विशेषकर हवामहल हमेशा से ही वैश्विक मंच पर राजस्थान का चेहरा रहे हैं। ऐसे में इस स्थान की सुरक्षा को लेकर कोई भी कोताही नहीं बरती जा सकती।

हवामहल सुरक्षा संवेदनशीलता इंडेक्स

सुरक्षा मानक (Security Parameters)हवामहल की वर्तमान स्थिति / विशेषता (Features)एटीएस का रिस्पॉन्स प्लान (ATS Strategy)पर्यटकों की संख्याप्रतिदिन हजारों देशी-विदेशी सैलानी आते हैं।भीड़भाड़ वाले इलाके में त्वरित रेस्क्यू की क्षमता बढ़ाना।ऐतिहासिक बनावट953 नक्काशीदार खिड़कियां और बेहद संकरे रास्ते हैं।संकरी सीढ़ियों में बिना भगदड़ के ऑपरेशन चलाना।भौगोलिक स्थितिमुख्य सड़क और व्यस्त बड़ी चौपड़ बाजार के ठीक पास है।बाहरी ट्रैफिक को तुरंत रोककर इनर कोर्डन तैयार करना।ग्लोबल विजिबिलिटीविश्व धरोहर (UNESCO) परकोटे का प्रमुख हिस्सा है।अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल को लाइव टेस्ट करना।

हवामहल की अधीक्षक सरोजनी चंचलानी ने बताया कि इस प्रकार के समय-बद्ध अभ्यासों से न केवल हमारे स्थानीय सुरक्षा गार्ड्स और स्टाफ की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता (Disaster Response Capacity) का मूल्यांकन होता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर जयपुर और राजस्थान पर्यटन को लेकर एक बहुत ही सकारात्मक और सुरक्षित संदेश जाता है कि मरुधरा की पुलिस हर स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे मुस्तैद है।