Rajasthan Mega Highway : जयपुर-भीलवाड़ा मेगा हाईवे को फोरलेन बनाने की मांग तेज, एक साल में 100 से ज्यादा मौतें

Jaipur Bhilwara Mega Highway : फागी (जयपुर)। फागी से गुजरने वाला जयपुर–भीलवाड़ा मेगा हाईवे अब लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा खतरे का रास्ता बनता जा रहा है। सड़क की कम चौड़ाई, गहरे गड्ढे, सुरक्षा संकेतकों की कमी और लगातार बढ़ते हादसों ने इस मार्ग को ‘मौत का हाईवे’ बना दिया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि बीते एक वर्ष में इस मार्ग पर 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन अब तक ठोस कदम उठाने में विफल साबित हुए हैं।

ताजा मामला फागी कस्बे की दंड की ढाणी क्षेत्र का है, जहां बाइक सवार रामावतार माली की सामने से आ रही दूसरी बाइक से टक्कर हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद एक बार फिर सड़क सुरक्षा और हाईवे की खराब स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

जरा सी चूक भी जानलेवा

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण वाहन चालकों को मजबूरी में ओवरटेक करना पड़ता है, जिससे आमने-सामने की भिड़ंत की आशंका बनी रहती है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच थोड़ी सी चूक भी जानलेवा साबित हो रही है। इसके अलावा मार्ग पर कई जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिनसे बचने के प्रयास में वाहन चालक संतुलन खो देते हैं या अन्य वाहनों से टकरा जाते हैं।

संकेतक बोर्ड, रिफ्लेक्टर का अभाव

हाईवे पर पर्याप्त संकेतक बोर्ड, रिफ्लेक्टर और चेतावनी चिन्ह नहीं होने से रात के समय दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। यात्रियों का आरोप है कि टोल वसूली तो पूरी की जा रही है, लेकिन सड़क पर मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों का अभाव है। लोगों का कहना है कि टोल के नाम पर मनमानी वसूली हो रही है, जबकि सड़क की स्थिति लगातार बदहाल होती जा रही है।

डीपीआर तैयार, प्रशासनिक स्वीकृति नहीं

क्षेत्रवासी लंबे समय से जयपुर-भीलवाड़ा मेगा हाईवे को फोरलेन बनाने की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि सड़क चौड़ीकरण की डीपीआर तैयार हो चुकी है, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इससे लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।

ग्रामीणों ने दी चेतावनी

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते हाईवे चौड़ीकरण, गड्ढों की मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित नहीं किए गए तो आंदोलन किया जाएगा। लोगों का कहना है कि हर हादसे के बाद केवल संवेदना जताई जाती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी पहल नजर नहीं आती।