राजस्थान के किसान अपनी खून-पसीने की कमाई और फसल को सही दामों पर बेचने के लिए एक बार फिर सड़कों और मंडियों में उतरने को मजबूर हैं। ताजा मामला चूरू जिले की सिद्धमुख कृषि मंडी का है, जहां इन दिनों न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर चने की सरकारी खरीद और तुलाई का काम चल रहा है। लेकिन इस खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और व्यापक स्तर पर धांधली के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
किसानों के इस दर्द को आवाज देने के लिए सादुलपुर (राजगढ़) की पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया खुद मैदान में उतर आई हैं। शनिवार को वे अचानक सिद्धमुख कृषि मंडी पहुँचीं और वहां अव्यवस्थाओं को देखकर भड़क उठीं। बिना किसी तामझाम के वे आम किसानों के साथ धरने पर बैठ गईं।
अन्नदाता के साथ क्या हो रहा है ‘धोखा’?
सिद्धमुख कृषि मंडी में किसानों का धरना
मंडी में विरोध प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों किसानों और कृष्णा पूनिया का आरोप है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर तौल (तुलाई) को लेकर भारी गड़बड़ी की जा रही है। किसानों का दावा है कि चने की बोरियों के वजन में हेरफेर किया जा रहा है और मानकों के नाम पर गरीब किसानों को परेशान किया जा रहा है।
आरोप है कि कड़कड़ाती धूप और गर्मी के इस मौसम में किसानों को कई-कई दिनों तक मंडी के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बाद भी नमी या क्वालिटी का बहाना बनाकर उनके चने को रिजेक्ट करने का खेल खेला जा रहा है, जिससे किसान औने-पौने दामों पर व्यापारियों को फसल बेचने पर मजबूर हो रहे हैं।
टोकन सिस्टम में गड़बड़ी !
स्थानीय किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और टोकन व्यवस्था में भी चहेतों को फायदा पहुँचाया जा रहा है, जबकि वास्तविक किसान चक्कर काट रहे हैं।
जब तक न्याय नहीं, तब तक… : कृष्णा पूनिया
धरना स्थल से मंडी प्रशासन और राजस्थान सरकार को चुनौती देते हुए पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसानों के साथ हो रहे इस अन्याय को मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकतीं।
उन्होंने कहा कि किसान रात-दिन मेहनत करके फसल उगाता है। जब वह उसे सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य पर बेचने मंडी आता है, तो यहाँ बैठे अधिकारी और बिचौलिए मिलकर उसे लूटने का जाल बिछा देते हैं।
पूनिया ने कहा कि सिद्धमुख मंडी में चने की तुलाई में जो धांधली चल रही है, उसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। जब तक हर एक किसान का दाना-दाना सही वजन और सही दाम के साथ नहीं तौला जाता, हमारा यह धरना खत्म नहीं होगा।
मंडी में डटे किसान, चक्काजाम की चेतावनी
कृष्णा पूनिया के धरने पर बैठते ही आसपास के दर्जनों गांवों से सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में चना भरकर सिद्धमुख मंडी पहुँच गए हैं। पूरा मंडी परिसर ‘किसान-एकता जिंदाबाद’ और ‘मंडी प्रशासन होश में आओ’ के नारों से गूंज उठा।
किसान नेताओं ने साफ किया है कि यदि तुलाई के नियमों को सरल नहीं किया गया और पारदर्शी कांटा नहीं लगाया गया, तो वे चूरू-हरियाणा बॉर्डर और मुख्य मार्गों पर चक्काजाम करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
सरकार के लिए आंदोलन ‘सिरदर्द‘
राजस्थान का शेखावाटी और विशेष रूप से चूरू जिला हमेशा से किसान राजनीति का केंद्र रहा है। इस धरने के जरिए कृष्णा पूनिया ने एक बार फिर क्षेत्र के किसानों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करने का संकेत दे दिया है।
प्रदेश की वर्तमान सरकार के लिए यह आंदोलन सिरदर्द बन सकता है, क्योंकि चना राजस्थान की एक मुख्य रबी फसल है और इसकी खरीद में गड़बड़ी सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।