करौली: जिले के सबसे बड़े पांचना बांध के पानी को लेकर शुक्रवार को पांचना बांध पर आयोजित हुई किसान महापंचायत में वक्ताओं ने एक स्वर में बांध से पहले क्षेत्र के 39 गांवों को पानी देने की मांग को दोहराया। वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि पांचना बांध निर्माण में क्षेत्र के खेत-जमीन चली गई। ऐसे में बांध के पानी पर पहला हक क्षेत्र के 39 गांवों का है। 39 गांवों को पानी नहीं मिलने तक बांध से एक बूंद पानी नहीं जाने देंगे।
गुड़ला-पांचना संघर्ष समिति 39 गांव पांचना गुड़ला के तत्वावधान में हुई महापंचायत में आसपास के क्षेत्रों सहित दूरदराज गांवों-कस्बों से बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए। गिरधर पटेल मूंडिया की अध्यक्षता में हुई महापंचायत में संघर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह धाभाई सहित करौली विधायक दर्शनसिंह गुर्जर, विजय बैसला, महिला कांग्रेस अध्यक्ष शरदो गुर्जर, सामाजिक कार्यकर्ता बबलू शुक्ला, सियाराम गुर्जर, हाकिम सिंह बैसला, जनक सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
39 गांवों को पानी मिले, तभी बांध से पानी छोड़ा जाएगा
संघर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह धाभाई ने कहा कि हम सरकार से लगातार क्षेत्र के 39 गांवों को पानी देने की मांग कर रहे हैं। बांध निर्माण के दौरान हमारी जमीन गई और हमारे ही खेतों को पानी नहीं मिल रहा। वे बोले कि पहले क्षेत्र के 39 गांवों को पानी मिले, तभी बांध से पानी छोड़ने दिया जाएगा।
वहीं विजय बैसला ने भी कहा कि जिन लोगों की बांध में जमीन गई है, उनका पानी पर पहला हक है। क्षेत्र में पेयजल संकट है। सरकार-प्रशासन 39 गांवों का सर्वे कराकर डीपीआर तैयार कराए और नहरों का निर्माण कराकर पानी पहुंचाए। विधायक दर्शनसिंह ने किसानों की मांग से सरकार को अवगत कराकर समस्या समाधान की बात कही।
महापंचायत में रामस्वरूप बैसला, सियाराम गुर्जर, शरदो गुर्जर, रजन मास्टर, रामनरेश ताजपुर, गजराजसिंह, अतरसिंह, अनूप डायरेक्टर खेड़ली, मुरारी खटाना, बहादुरसिंह ताली, गुमानसिंह मुंडिया, रूपसिंह मीना, गाजियाबाद से आए भारतीय किसान यूनियन के मुनेन्द्र गुर्जर, वचनसिंह सुंदरपुरा, सतवीर चंदीला, कुंवरसिंह एडवोकेट, तारा हिण्डौन, सूबेदार वीरेन्द्र, बबलू शुक्ला, लोकेश पीपलखेड़ा, कमलेश मीना सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।
समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह धाभाई ने बताया कि महापंचायत में लिए निर्णय के अनुसार बांध के पानी की निगरानी शुरू की गई है। गांववार ड्यूटी लगाकर 30 मई तक निगरानी की जाएगी।
बांध निर्माण में चली गई हमारी जमीन
विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि गंभीर नदी पर पांचना बांध के निर्माण के दौरान आसपास के गांवों की जमीन चली गई। बांध का निर्माण 1972 में आई बाढ़ के दौरान भरतपुर तक बाढ़ के हालात बन गए, उससे बचाव के लिए सरकार ने पांचना बांध का निर्माण कराया गया, उसके बाद से ही गंभीर नदी में पानी की आवक थम गई। वहीं सरकार ने कमांड एरिया का निर्धारण उनके क्षेत्र में नहीं करके दूसरे क्षेत्र में कर दिया। इससे क्षेत्र के गांवों के खेतों के लिए पानी ही नहीं मिल रहा है। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार पहले बांध क्षेत्र के आसपास के 39 गांवों के खेतों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था करे।
इस दौरान किसानों ने एकजुटता का संकल्प लेते हुए इस संघर्ष में तन-मन-धन से सहयोग की बात कही। इसके साथ महापंचायत में गंभीर नदी क्षेत्र के 360 गांवों में भी पानी संकट का मुद्दा उठाते हुए कई वक्ताओं ने गंभीर नदी क्षेत्र में भी पानी उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
वे बोले कि पहले 39 गांवों के खेतों को पानी मिले, फिर गंभीर नदी तटीय क्षेत्र के 360 गांवों को भी पानी दिया जाए। नदी के सूखने से क्षेत्र में पानी का संकट है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार पांचना बांध में चम्बल नदी से पानी लाने की व्यवस्था करे।
सौंपा ज्ञापन
महापंचायत स्थल पर गुड़ला-पांचना संघर्ष समिति ने एडीएम हेमराज परिडवाल व एएसपी गुमनाराम को ज्ञापन सौंपकर गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना के जरिए समीपवर्ती सभी 39 गांवों को पानी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।