Rajasthan Teacher Transfer : बनकोडा. राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण का मुद्दा फिर सुर्खियों में है। नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रेल से शुरू हो चुका है, पर तबादलों पर लगा प्रतिबंध अब तक नहीं हटा है। प्रदेशभर के लाखों शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। अनुमान है कि एक लाख से अधिक शिक्षक लंबे समय से अपनी गृह जिले या इच्छित स्थान पर जाने की आस लगाए बैठे हैं।
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के अंतिम तबादले वर्ष 2018 में हुए थे। इसके बाद से अब तक कोई नियमित स्थानांतरण प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। वर्तमान सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में दो बार फरवरी 2024 और जनवरी 2025 तबादलों से प्रतिबंध हटाया गया, लेकिन शिक्षा विभाग को इस दायरे से बाहर रखा गया। इससे शिक्षकों में निराशा और बढ़ गई है।
6 साल से अटकी पदोनति
तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति भी पिछले 6 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है। अतिरिक्त विषय वाले शिक्षकों के विवाद के कारण मामला अटका हुआ है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं होने से 25 हजार पदोन्नतियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। बिना पदोन्नति के ही प्रतिवर्ष हजारों शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं। पदोन्नति नहीं होने से इसका सीधा असर प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं पर भी पड़ रहा है। जहां एक ओर अनुभवी शिक्षक पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं वहीं युवा प्रशिक्षित बेरोजगार सोच रहे हैं कि पदोन्नतियां शुरू हो जाए तो तृतीय श्रेणी शिक्षकों की बम्पर भर्ती की विज्ञप्ति जारी हो सके।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अन्य सभी संवर्गों यथा प्रधानाचार्य, प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी शिक्षकों सहित विभिन्न विभागों में लगभग हर वर्ष तबादले होते रहे हैं, लेकिन तृतीय श्रेणी शिक्षकों के मामले में स्थिति बिल्कुल अलग है। इन शिक्षकों के लिए वर्षों से कोई स्थायी नीति लागू नहीं हो पाई है।
आंकड़ों में यह है स्थिति
प्रदेशभर में वर्तमान में तृतीय श्रेणी (लेवल-1 एवं लेवल-2) शिक्षकों की संख्या 2,41,060 है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जो वर्षों से दूर के क्षेत्रों में कार्यरत हैं। डूंगरपुर जिले की बात करें तो यहां 8,467 तृतीय श्रेणी शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से अधिकांश स्थानांतरण की प्रतीक्षा में हैं।
लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहने या दूरदराज क्षेत्रों में पदस्थापित होने के कारण शिक्षकों को पारिवारिक, सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई शिक्षक अपने परिवार से दूर रहकर सेवा दे रहे हैं, जिससे उनके बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर भी असर पड़ रहा है। महिला शिक्षकों के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है।
उदयपुर संभाग के विभिन्न जिलों की फैक्ट फाइल
प्रारम्भिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षक
जिला – एल2 – एल1 – कुल
बांसवाड़ा – 1496 – 5158 – 6654
चित्तौड़गढ़ – 1749 – 2848 – 4597
डूंगरपुर – 1295 – 4098 – 5393
प्रतापगढ़ – 829 – 2411 – 3240
राजसमंद – 1325 – 2577 – 3902
सलूम्बर – 551 – 1689 – 2240
उदयपुर- 1659 – 5486 – 7145
कुल- 8904 24267 33171।
माध्यमिक शिक्षा विभाग में लेवल-2 तथा लेवल -1 में कार्यरत शिक्षक
जिला – एल2 – एल1 – कुल
बांसवाड़ा – 1528 – 1372 – 2900
चित्तौड़गढ़ – 1032 – 1100 – 2132
डूंगरपुर – 1196 – 1056 – 2252
प्रतापगढ़ – 779 – 610 – 1389
राजसमंद – 852 – 893 – 1745
सलूम्बर – 484 – 325 – 809
उदयपुर – 1681 – 1639 – 3320
कुल- 7552 – 6995 – 14547।
माध्यमिक एवं प्रारम्भिक शिक्षा विभाग में कुल तृतीय श्रेणी अध्यापक
33171 14547 = 47,718
अकेले डूंगरपुर जिले में कुल तृतीय श्रेणी अध्यापक
5393 2252 =7,645।
शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर राहत देनी चाहिए
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले वर्षों से लंबित हैं, जिससे शिक्षकों में असंतोष है। सरकार को पारदर्शी और समयबद्ध ट्रांसफर नीति लागू कर प्रतिकूल क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर राहत देनी चाहिए।
डॉ.ऋषिन चौबीसा, प्रदेश उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ