पटाक्षेप… आखिर 6 माह बाद एमएलएसयू को मिले स्थायी कुलगुरु

उदयपुर. राज्यपाल व कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने बुधवार शाम मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के नए कुलगुरु के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी। आखिर 6 माह बाद यूनिवर्सिटी को स्थाई कुलगुरु मिल गए। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में रसायन विभाग के पूर्व प्रोफेसर कैलाश डागा को कुलगुरु नियुक्त किया है। प्रो. डागा का कार्यकाल तीन साल का रहेगा।वर्तमान में कुलगुरु का अतिरिक्त कार्यभार अजमेर विवि के प्रोफेसर बीपी सारस्वत संभाल रहे हैं। बड़ी बात ये कि अंतिम पांच नामों में तीन उम्मीदवार उदयपुर के थे, जिनकी इस बात भी नहीं चल पाई। प्रो. कैलाश डागा मूलतः जोधपुर के निवासी हैं। उनकी पहचान सक्रिय शिक्षाविद के साथ ही आरएसएस के समर्पित स्वयंसेवक के रूप में भी रही है। उन्हें हाल ही में हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय जयपुर के प्रबंधन बोर्ड में राज्यपाल का प्रतिनिधि भी मनोनीत किया गया है। उनकी नियुक्ति के बाद विश्वविद्यालय में लंबे समय से बनी प्रशासनिक अस्थिरता खत्म होने की उम्मीद बनी है। प्रो. डागा ऐसे समय में पदभार संभाल रहे हैं, जब विश्वविद्यालय कई प्रशासनिक और शैक्षणिक समस्याओं से जूझ रहा है।

नए कुलगुरु के सामने ये बड़ी चुनौतियां

1. रिक्त पदों पर अटकी भर्तियां : शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक कार्मिकों की कमी है। कई पदों का अतिरिक्त कार्यभार दे रखे हैं, वहीं 280 नॉन-टीचिंग पद रिक्त है। नियमित भर्ती शुरू करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

2. सामंजस्य और आउटसोर्सिंग का मुद्दा : विवि में 250 कर्मचारी सेल्फ फाइनेंस और अनुबंध पर कार्यरत हैं। इन्हें आउटसोर्सिंग एजेंसी से नियुक्त करने का दबाव है, जबकि कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। ऐसे में समाधान बड़ी चुनौती है।

3. शिक्षकों की गुटबाजी : लंबे समय से गुटबाजी पूर्व कुलपतियों की विफलता का कारण रही है। प्रो. डागा को इन गुटों से ऊपर उठकर संतुलित और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण तैयार करना होगा।

4. समय पर परीक्षा और परिणाम : नई शिक्षा नीति के तहत शैक्षणिक सत्रों को नियमित करना, समय पर परीक्षाएं आयोजित कराना और शीघ्र परिणाम घोषित करना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

5. वित्तीय प्रबंधन और पेंशन: आने वाले समय में सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन और विश्वविद्यालय की अन्य वित्तीय देनदारियों का प्रबंधन भी नए कुलगुरु के सामने अहम चुनौती रहेगा।

कार्यकाल पूरा नहीं कर सके दो कुलगुरु

प्रो. अमेरिका सिंह और प्रो. सुनीता मिश्रा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे। स्थानीय गुटबाजी और कार्यप्रणाली को समझने में असफल रहने के कारण वे प्रशासनिक संतुलन नहीं बना सके। दोनों कुलगुरु उत्तरप्रदेश से थे। ऐसे में जोधपुर निवासी प्रो. डागा से स्थानीय परिस्थितियों और समीकरणों को बेहतर ढंग से समझकर समस्याओं के समाधान की उम्मीद की जा रही है।

सर्च कमेटी के पांच नामों में से ही चयन

राज्यपाल ने मार्च में कुलगुरु चयन के लिए सर्च कमेटी का गठन किया था। समिति ने देशभर से आवेदन मांगे थे। करीब 70 आवेदनों में से पांच नामों का पैनल तैयार कर राज्यपाल को भेजा गया। इनमें प्रो. आनंद पालीवाल, प्रो. एसएस सारंगदेवोत, प्रो. कैलाश डागा, प्रो. सीमा मलिक और प्रो. अर्चना कटेजा के नाम थे। इन पर विचार-विमर्श के बाद राज्यपाल ने प्रो. डागा के नाम पर मुहर लगाई।

कला को मिला मान, सुविवि के प्रो. राठौड़ बृज यूनिवर्सिटी के कुलगुरु

राज्यपाल की घोषणा के मुताबिक मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी आट्र्स कॉलेज के डीन और विजवल आर्ट के प्रोफेसर मदनसिंह राठौड़ को भरतपुर की महाराजा सूरजमल बृज यूनिवर्सिटी का कुलगुरु नियुक्त किया गया है।

प्रो. राठौड़ मूलत: बाड़मेर से है। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से सन 1998 में विजुअल आर्ट में पीएचडी की। वे पिछले 28 साल से मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में सेवाएं दे रहे हैं। इन्हें वर्ष 2003 में राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से सम्मानित किया गया था।

प्रो. राठौड़ सुविवि में डीएसडब्ल्यू सहित कई पदों पर रह चुके हैं। वे पिछले एक साल से आट्र्स कॉलेज डीन हैं। वे जोधपुर की यूनिवर्सिटी में राज्यपाल के प्रतिनिधि सहित कई विश्वविद्यालयों में मनोनीत सदस्य रहे हैं। प्रो. राठौड़ का भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव है। प्रो. राठौड़ बृज यूनिवर्सिटी में वीसी सर्च कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं। उन्होंने बृज विश्वविद्यालय कुलगुरु पद के लिए आवेदन किया था और एक लंबी प्रक्रिया से गुजरने के बाद उनका चयन हुआ है।

संस्था विकास पर जोर: राठौड़

प्रो. मदन राठौड़ का कहना है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर संस्था के विकास और विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखकर अगर हम काम करेंगे तो बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। उन्होंने इसी सोच के साथ नई जिम्मेदारी की शुरुआत करने की बात कही है।