JNVU Jodhpur : गिग वर्कर और डीपफेक को हिंदी में क्या कहेंगे? 300 शब्दों पर हुआ मंथन, जल्द ​होगा अंतिम फैसला

JNVU Jodhpur : जोधपुर। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और डिजिटल प्रशासन के तेजी से बदलते दौर में भाषा को समय के अनुरूप ढालना अब केवल अनुवाद का काम नहीं, बल्कि बौद्धिक चुनौती बन गया है। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में पिछले पांच दिनों तक चली एक विशेष बैठक में देशभर के विशेषज्ञों ने ऐसे ही नए तकनीकी और प्रशासनिक शब्दों के हिंदी मानकीकरण पर मंथन किया। बैठक में एआइ, साइबर अपराध, प्रशासनिक व्यवस्था और डिजिटल समाज से जुड़े कई नए शब्दों को हिंदी रूप प्रदान किया गया। इसमें गिग वर्कर को ‘परिभ्रमी कामगार’ और लॉकडाउन को ‘पूणबंदी’ जैसे शब्दों का अंतिम रूप दिया गया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग की ओर से आयोजित बैठक में 300 से अधिक शब्दों पर मंथन किया गया। इन शब्दों को लेकर आयोग की ओर से एक पुस्तक का प्रकाशन किया जाएगा। आयोग की अगली बैठक में इसे अंतिम तौर पर स्वीकृत कर लिया जाएगा।

मानकीकृत हिंदी शब्द जरूरी, अर्थ व भाव महत्वपूर्ण

समाज विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कान्ता कटारिया ने कहा कि किसी भी शब्द को मानक रूप देने के पीछे लंबी बहस, संदर्भ विश्लेषण और सामाजिक स्वीकार्यता की प्रक्रिया होती है।

आयोग के सहायक निदेशक एम.के. भारल ने बताया कि आइटी और एआइ के युग में प्रतिदिन नए शब्द सामने आ रहे हैं। यदि उनके लिए सटीक और मानकीकृत हिंदी शब्द उपलब्ध नहीं होंगे तो अर्थ और भाव, दोनों बदल सकते हैं। इसलिए आयोग विभिन्न विषयों में शब्दावली निर्माण के माध्यम से भ्रम की स्थिति को समाप्त करने का प्रयास कर रहा है।

शब्दों का हिंदी रूपांतरण

प्रचलित – नए हिंदी शब्द
गिग वर्कर – परिभ्रमी कामगार
सेक्सोटॉर्शन – यौन शोषण भयादोहन
गैंग प्लांक – समस्तरीय संप्रेषण
लॉकडाउन – पूर्णबंदी
मॉब लिंचिंग – भीड़ जनित न्यायेत्तर हिंसा
पीक एक्सपीरियंस – चरम अनुभव
स्मार्ट गवर्नमेंट – निपुण सरकार
लिप सर्विस – दिखावटी सेवा
एडमिनिस्ट्रेटिव इगोइज़्म – प्रशासनिक अहम्
डीपफेक – एआइ जनित भ्रामक जानकारी
अजायल एडमिनिस्ट्रेशन – फुर्तीला प्रशासन

तकनीकी शब्दों का निर्माण ‘बौद्धिक तपस्या’

तकनीकी शब्दों का निर्माण केवल भाषाई प्रक्रिया नहीं, बल्कि ‘बौद्धिक तपस्या’ है। यह कार्य विद्यार्थियों के लिए भविष्य में नए शोध विषयों और अध्ययन की संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
प्रो. पवन कुमार शर्मा, कुलगुरु, जेएनवीयू, जोधपुर