खाकी वर्दी ने न केवल कानून का पालन किया, बल्कि इंसानियत का फर्ज निभाते हुए लावारिस शव का पूरे सम्मान और हिंदू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार करवाया। दरअसल कुछ दिन पहले सदर थाना पुलिस को सूचना मिली मिली थी कि बर्डोद गांव में शराब ठेके के पास एक व्यक्ति बेसुध पड़ा हुआ है। जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो पाया कि उस व्यक्ति की मौत हो चुकी है। पुलिस ने तुरंत शव को अपने कब्जे में लिया और उसकी शिनाख्त की कोशिश शुरू कर दी। शुरुआती जांच में मृतक के पास ऐसा कोई दस्तावेज या सामान नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके।
पहचान के लिए सोशल मीडिया का लिया सहारा
सदर पुलिस के मुताबिक पुलिस ने मृतक की पहचान के लिए काफी प्रयास किए। आसपास के गांवों में पूछताछ करने के साथ साथ जिले के सभी थानों को मृतक का हुलिया और फोटो भेजी गई। इतना ही नहीं, पुलिस ने सोशल मीडिया ग्रुप्स और अन्य माध्यमों का भी सहारा लिया ताकि अगर दूर दराज का भी कोई रिश्तेदार हो, तो उसे सूचना मिल सके। पहचान की उम्मीद में शव को जिला अस्पताल की मोर्च्युरी (शवगृह) में सुरक्षित रखवाया गया था।
जब कोई नहीं आया, तो पुलिस बनी सहारा
कानूनन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब कोई परिजन शव लेने नहीं पहुंचा, तो पुलिस प्रशासन ने खुद जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। पुलिस अधिकारियों का मानना था कि हर इंसान का अंतिम विदाई सम्मानजनक होनी चाहिए। इसके बाद पुलिस ने पूरी कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी की गईं।
नगर परिषद के सहयोग से अज्ञात व्यक्ति के शव को श्मशान घाट ले जाया गया, जहाँ पुलिसकर्मियों ने हिंदू रीति रिवाज के अनुसार उसका दाह संस्कार करवाया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस की इस संवेदनशीलता की जमकर तारीफ की है। लोगों का कहना है कि पुलिस का यह रूप समाज में विश्वास पैदा करता है कि लावारिस होने के बावजूद किसी को ‘बेसहारा’ नहीं छोड़ा जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया है, लेकिन रिकॉर्ड में जानकारी सुरक्षित रखी गई है ताकि भविष्य में कभी पहचान होने पर परिजनों को सूचित किया जा सके।