केरल में कांग्रेस की जीते के पीछे था सचिन पायलट का ये सीक्रेट प्लान, बदल गई दक्षिण की राजनीति

जयपुर: देश के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों के बीच कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी और सुखद खबर ‘केरलम’ (केरल) से आई है। राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सत्ता में ऐतिहासिक वापसी की है।

बता दें कि 140 सीटों वाली केरलम विधानसभा में शुरुआती रुझानों और नतीजों में यूडीएफ 100 के करीब सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिससे कांग्रेस खेमे में भारी उत्साह है।

इस धमाकेदार जीत के पीछे कांग्रेस के युवा और कद्दावर नेता सचिन पायलट की रणनीतिक कुशलता को एक बड़ा गेम चेंजर माना जा रहा है। पार्टी ने उन्हें केरलम में सीनियर ऑब्जर्वर (वरिष्ठ पर्यवेक्षक) की अहम जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।

पायलट की सटीक रणनीति और संगठन में नई जान

केरलम में कांग्रेस की इस शानदार वापसी के पीछे सचिन पायलट का संगठनात्मक अनुभव और जमीनी पकड़ काफी प्रभावी साबित हुई।

पायलट ने टिकट वितरण में संतुलन साधने का काम किया, जिससे पार्टी के भीतर गुटबाजी कम हुई और सही उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया।

केरलम के 14 में से 10 जिलों का सघन दौरा कर उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा।

पायलट ने चुनाव में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिसका सीधा असर मतदाताओं पर पड़ा।

जीत के बाद सचिन पायलट का ट्वीट

मैं उन सभी यूडीएफ उम्मीदवारों को हार्दिक बधाई देता हूं, जिन्होंने जनता का विश्वास जीतने के लिए अथक प्रयास किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी, सीपीपी चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी के नेतृत्व में हमारा अभियान जमीनी मुद्दों से जुड़ा और केरलम की जनता ने हमारे प्रगतिशील दृष्टिकोण को स्वीकार किया।

‘क्राउड पुलर’ की छवि

सचिन पायलट को भारतीय राजनीति में एक बड़े ‘क्राउड पुलर’ नेता के रूप में देखा जाता है। केरलम में उनका यह जादू सिर चढ़कर बोला। पायलट ने राज्य में डेरा डालकर धुआंधार प्रचार किया। उन्होंने औसतन हर दिन 5-6 रैलियां, रोड शो और डोर-टू-डोर अभियान किए।

उन्होंने राज्य की 55 से अधिक सीटों पर सीधे जाकर प्रचार की कमान संभाली, जिन क्षेत्रों में उनका सीधा दखल था, वहां पार्टी को अप्रत्याशित सफलता मिली है। राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के प्रभारी सचिन पायलट की रैलियों में युवाओं और महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिसने कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार किया।

बंगाल में भी दिखा असर

केरल के साथ-साथ पायलट ने पश्चिम बंगाल में भी अपनी सक्रियता दिखाई थी। उन्होंने महज 24 घंटे के भीतर मुर्शिदाबाद और मालदा बेल्ट में 5 जनसभाएं और एक रोड शो किया। हालांकि, वहां के चुनावी नतीजे कांग्रेस के पक्ष में नहीं रहे, लेकिन पायलट के प्रचार के चलते इन इलाकों में कांग्रेस के वोट शेयर में 2 से 3% का इजाफा देखने को मिला है।

दिल्ली में जश्न, पायलट का बढ़ा सियासी कद

केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन (UDF) की इस शानदार जीत के बाद सचिन पायलट के दिल्ली कार्यालय पर समर्थकों और शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है। कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है और मिठाइयां बांटी जा रही हैं।

राजस्थान में साल 2018 में प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस को सत्ता में लाने वाले सचिन पायलट ने अब केरलम में भी अपनी रणनीतिक सूझबूझ का लोहा मनवाया है। इस जीत ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के भीतर पायलट के सियासी कद को और मजबूत कर दिया है।