रिटायरमेंट की अनोखी कहानीः कई महीनों तक सस्पेंड रहे, लड़ते रहे उसूलों की जंग, एक घंटे पहले इस तरह लौटा सम्मान

Rajasthan High Court Decision: राजस्थान में रिटायरमेंट की एक अनोखी कहानी सामने आई है। शिक्षा विभाग से जुड़े एक अधिकारी को रिटायरमेंट से सिर्फ एक घंटा पहले ना सिर्फ उनका खोया हुआ सम्मान और इज्जत वापस मिली बल्कि विभाग को फटकार भी लगी। मामला झुंझुनूं जिले में प्रांरभिक शिक्षा विभाग में डीईओ अधिकारी से जुड़ा हुआ है। उनको शिक्षा विभाग ने 11 महीने तक सस्पेंड रखा, विभाग के आदेश के खिलाफ वे हाईकोर्ट पहुंचे। वहां उनका न्याय मिला वह भी रिटायरमेंट से सिर्फ एक घंटा पहले। उनके बहाली आदेश हुए और साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कोर्ट ने फटकार अलग से लगाई। पूरा मामला बेहद ही रोचक है।

यह है पूरा मामला, आदेश नहीं मानने पर किया गया था सस्पेंड

दरअसल पूरा मामला झुंझुनूं में प्रारम्भिक शिक्षा विभाग में डीईओ की पोस्ट पर तैनात मनोज ढाका से जुड़ा हुआ है। मनोज के खिलाफ करीब एक साल पहले शिक्षा विभाग ने एक्शन लिया था और उनको निलंबित कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने नियमों के खिलाफ जाकर दूरदराज के इलाकों में लगे हुए शिक्षकों को गलत तरीके से शहर के आसपास के इलाकों में नियुक्ती दे दी। जिसके कारण शिक्षा विभाग में उपरी लेवल तक उनकी शिकायतें पहुंची और अधिकारियों ने उनको करीब 11 महीने पहले निलंबित कर दिया। जबकि उन्होंने पूरे तबादले नियमों के अनुसार किए थे। जो कि अब कोर्ट में प्रूव हो गए।

सस्पेंशन के खिलाफ अधिकारियों से मिले, अपना पक्ष रखा, लेकिन बात नहीं बनी

निलंबन अवधि के दौरान ढाका ने अपने किए गए तबादलों की पूरी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दी और बताया कि ये नियमों के खिलाफ नहीं है। लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी। आखिर पिछले साल जून के महीने में उन्होंने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने नवम्बर 2025 में उनको निलंबन आदेशों पर रोक लगा दी और उनको जल्द ही नियुक्ति देने के लिए शिक्षा विभाग को आदेश दिए। लेकिन विभाग ने उसके बाद भी मनोज ढाका को वापस जॉब पर नहीं लिया। उल्टे नियमों का हवाला देकर उन्हें लटकाए रखा।

फिर से कोर्ट की शरण ली तो कोर्ट ने लगाई तगड़ी फटकार, वापस दिलाया सम्मान

उसके बाद ढाका एक बार फिर से तमाम हालात लेकर हाईकोर्ट पहुंचे और इस बार हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को तगड़ी फटकार लगाते हुए ढाका के पक्ष में ऑर्डर दिया। कोर्ट ने कहा कि उनकी तुरंत प्रभाव से बहाली। विभाग ने ऐसा ही किया। कोर्ट ने उनके पक्ष में 30 अप्रेल को ऑर्डर दिया और शाम साढ़े पांच बजे रिटायरमेंट से ठीक एक घंटा कुछ मिनट पहले विभाग ने बहाली आदेश मानते हुए विभाग से ससम्मान ढाका को रिटायर किया। ढाका ने कहा आखिर इसी तरह के रिटायरमेंट का मैं हकदार था, कोर्ट की दखल के बाद वह वापस मिला। रिटायरमेंट पूरा हुआ।