Jaipur: हर दिन 48 झूठी FIR पर डीजीपी सख्त… अब बस? फर्जी रिपोर्ट लिखवाई तो जाना होगा जेल

Rajasthan Police Action: राजस्थान में बेबुनियाद और झूठी एफआइआर का बढ़ता ग्राफ पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है। इस साल के शुरुआती 4 महीने में ही औसतन हर दिन 48 से अधिक झूठे मामले दर्ज हुए हैं। इस स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि अब केवल एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाकर फाइल बंद नहीं होगी, बल्कि झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वालों को कोर्ट से सजा दिलाने तक पुलिस पीछा करेगी।

पुलिस संसाधनों की बर्बादी

1 जनवरी से 30 अप्रेल 2026 तक प्रदेश में कुल 95,441 आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से जांच के बाद 5,768 प्रकरण झूठे पाए गए। इसके अलावा 8,302 अन्य मामलों में साक्ष्य न मिलने या सिविल नेचर होने के कारण एफआर लगाई गई।

अपहरण और बलात्कार के मामलों में सबसे ज्यादा ‘झूठ’

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, झूठे प्रकरणों में सबसे बड़ी संख्या अपहरण (789) और चोरी (417) के मामलों की है। बलात्कार जैसे गंभीर अपराध में भी 233 मामले बेबुनियाद निकले, जबकि हत्या के 14 और हत्या के प्रयास के 30 मामलों में इसी कारण एफआर लगानी पड़ी।

झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाले टॉप-10 जिले (1 जनवरी – 30 अप्रैल 2026):

भरतपुर: 275

धौलपुर: 273

अलवर: 264

गंगानगर: 241

पाली: 217

डीग: 216

करौली: 200

दौसा: 188

सीकर: 183

सवाईमाधोपुर: 182

ताकि निर्दोषों को मिले राहत

डीजीपी के इस आदेश का मुख्य लक्ष्य पुलिस संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। झूठी शिकायतों की जांच में पुलिस का कीमती समय और ऊर्जा बर्बाद होती है, जिससे वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है। अब सख्ती होने से न केवल निर्दोष लोग प्रताड़ना से बचेंगे, बल्कि पुलिस का ध्यान गंभीर अपराधों के नियंत्रण पर केंद्रित हो सकेगा।

आमेर थाने में कल पुलिस कमिश्नर की जनसुनवाई

जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल शनिवार को आमेर थाने में जनसुनवाई करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान कमिश्नर आमजन से सीधे रूबरू होकर उनकी शिकायतों का समाधान करेंगे।

जनसुनवाई में विशेष रूप से आमेर सर्कल के आमेर, ब्रह्मपुरी और जयसिंहपुरा खोर थाना क्षेत्रों के परिवादी अपनी समस्याएं और शिकायतें लेकर पहुंच सकते हैं। पुलिस कमिश्नर शिकायतों का मौके पर ही अध्ययन कर संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित निस्तारण के निर्देश देंगे। इस जनसुनवाई में पुलिस कमिश्नर के साथ स्पेशल कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर और डीसीपी (नॉर्थ) सहित पुलिस विभाग के कई आला अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।