Phalodi Bazar: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को लग सकता है बड़ा ‘झटका’, फलोदी सट्टा बाजार की भविष्यवाणी ने सभी को चौंकाया

जयपुर। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल सामने आने के बीच राजस्थान के फलोदी सट्टा बाजार ने भी अपने आकलन जारी कर दिए हैं और इस बार के अनुमान कई मायनों में चौंकाने वाले हैं। खासकर पश्चिम बंगाल को लेकर बाजार ने बड़ा उलटफेर जारी किया है, जहां करीब डेढ़ दशक बाद सत्ता परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है। सट्टा बाजार के मुताबिक यहां भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है, जो मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

यह वीडियो भी देखें

तृणमूल कांग्रेस को लग सकता है झटका

294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 सीटों का है। फलोदी बाजार के अनुमान के अनुसार भाजपा 148 से 151 सीटों के बीच सिमटते हुए भी इस जादुई संख्या को पार करती दिख रही है। दूसरी ओर लंबे समय से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को झटका लग सकता है। बाजार के आकलन में तृणमूल के खाते में 138 से 141 सीटें जाती दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर बाजार ने कोई स्पष्ट अनुमान पेश नहीं किया है।

असम में एनडीए गठबंधन मजबूत

पूर्वोत्तर की बात करें तो असम में भाजपा नीत एनडीए गठबंधन के लिए तस्वीर बेहद मजबूत बताई जा रही है। 126 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 64 सीटों की जरूरत होती है, जबकि फलोदी बाजार के मुताबिक एनडीए 98 से 100 सीटों तक पहुंच सकता है। वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगियों को 24 से 26 सीटों पर सिमटने का अनुमान है। दक्षिण भारत में भी सियासी तस्वीर दिलचस्प बनी हुई है। केरल में यूडीएफ गठबंधन की जोरदार वापसी का संकेत है, जहां उसे 78 से 80 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि एलडीएफ 60 से 62 सीटों पर सिमट सकता है।

तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन बढ़त बनाए हुए है और उसे 136 से 139 सीटों के बीच जीत मिलती नजर आ रही है। वहीं केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में भी एनडीए गठबंधन की स्थिति मजबूत बताई गई है। यहां 18 से 20 सीटों के साथ सत्ता में वापसी का अनुमान लगाया गया है। कुल मिलाकर, फलोदी सट्टा बाजार के ये अनुमान कई राज्यों में सत्ता संतुलन बदलने के संकेत दे रहे हैं। हालांकि अंतिम नतीजे ही इन आकलनों की सच्चाई तय करेंगे, लेकिन फिलहाल इन भविष्यवाणियों ने सियासी हलकों में हलचल जरूर तेज कर दी है।

नोटः यहां पर दी गई जानकारी अखबार, मीडिया रिपोर्ट्स और सट्टा बाजारों के जानकारों के माध्यम से दी गई है। हमारा उद्देश्य सट्टा को किसी भी प्रकार से प्रोत्साहन करना नहीं है।