लाठी फोर्ट खतरे में, ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षण का इंतजार

जैसलमेर रियासत की महत्वपूर्ण धरोहर लाठी कोट, जिसका निर्माण विक्रम संवत् 1940 में तत्कालीन महारावल बैरीशाल ने करवाया था, आज संरक्षण के अभाव में अपना अस्तित्व खो रहा है। वर्षों से गांव में स्थित यह ऐतिहासिक किला समय और मौसम की मार झेल रहा है, वहीं जिम्मेदारों की अनदेखी से इसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। किले के भीतर की भवन एवं दीवारें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं।

किले की प्राचीर में जड़े पत्थर पर उत्कीर्ण लेख के अनुसार तत्कालीन महारावल बैरीशाल ने कोट के साथ एक जलाशय का भी निर्माण करवाया था। किले में अद्वितीय शिल्पकारी, पत्थर के खंभों पर बेल बूटों की आकर्षक झलकियाँ मौजूद हैं, जो इसकी ऐतिहासिक भव्यता का प्रमाण देती हैं। बावजूद इसके, ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर कोई ठोस कवायद नहीं की जा रही है। सार-संभाल के अभाव में यह किला धीरे-धीरे नष्ट होता जा रहा है। जिम्मेदारों की ओर से इस ऐतिहासिक विरासत की देखभाल न होने के कारण लोगों ने किले के पीछे अतिक्रमण कर लिया है। किले के आसपास के क्षेत्र पर लगातार कब्जे हो रहे हैं, जिससे यह प्राचीन धरोहर और भी संकट में घिर गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने और किले की मरम्मत के लिए जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। छतरसिंह और दानसिंह जैसे शासकों ने लाठी की जनता के लिए कई लोककल्याणकारी कार्य किए, आज उनके नाम बड़े आदर से लिए जाते हैं, लेकिन उनकी विरासत अनदेखी का शिकार है।

तथ्यों पर नजर

-तत्कालीन महारावल बैरीशाल ने विक्रम संवत् 1940 में लाठी कोट का निर्माण करवाकर जलाशय खुदवाया था।

– किले के भीतर देवी के थान की प्राचीर में जड़े पत्थर पर इसका उल्लेख है।

-खुशालसिंह के पुत्र श्यामसिंह को जैसलमेर की गद्दी मिली, जहां वे शालिवाहन के नाम से जाने गए।

-दानसिंह ने अपनी न्यायप्रियता से जनता के दिलों में जगह बनाई।

-उनकी छह स्तंभों की छतरी पर हर वर्ष मेला लगता है।

साइबर अभियोजक पद के लिए 5 मई तक आवेदन मांगे

जैसलमेर जिले में साइबर क्राइम से संबंधित राज्य सरकार के प्रकरणों की पैरवी के लिए नवसृजित विशिष्ट लोक अभियोजक पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभिभाषक आगामी 5 मई तक निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकेंगे।

जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल ने बताया कि शासन सचिव, वादकरण विधि एवं विधिक कार्य विभाग, जयपुर के दिशा-निर्देशों के तहत यह प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। पद के लिए आवेदन करने वाले अभिभाषक को साइबर कानून विशेषज्ञ होना चाहिए और उनके पास न्यूनतम 10 वर्ष का वकालत का अनुभव अनिवार्य है। आवेदनकर्ता को राजस्थान लॉ एंड लीगल अफेयर्स डिपार्टमेंट मैनुअल 1999 के नियम 15(3) एवं धारा 16 के अनुसार घोषणा पत्र और शैक्षिक तथा अनुभव प्रमाण पत्रों की दो-दो सत्यापित प्रतियां जमा करानी होंगी। योग्य अभिभाषकों का पैनल तैयार कर विधि विभाग को भेजा जाएगा।