‘अंतिम जय हिंद मेरे भाई’, शहीद भाई को सल्यूट करने में कांपे हाथ, सीकर के लाल देशराज को दी गई अंतिम विदाई

सीकर। अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर गश्त के दौरान लैंडस्लाइड की चपेट में आकर शहीद हुए भारतीय सेना के जवान देशराज सिंह को मंगलवार को उनके पैतृक गांव काचरेड़ा में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पाटन थाने से काचरेड़ा तक लगभग छह किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों लोग अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने उमड़ पड़े। रास्ते भर पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

शहीद देशराज के परिजनों को उसकी शहादत की सूचना मंगलवार सुबह 5.30 बजे दी गई। इससे पहले देशराज के माता-पिता व पत्नी को शहादत की खबर नहीं दी थी। पति की शहादत की खबर सुनकर वीरांगना तमन्ना कुमारी बेहोश हो गईं। देशराज की एक साल की एक बेटी है जो अपने पिता की शहादत से बेखबर है।

शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर देते सेना के जवान (फोटो-पत्रिका)

स्वास्थ्य विभाग टीम ने मां-पत्नी को संभाला

जैसे ही शहीद की पार्थिव देह को उनके घर ले जाया गया वहां कोहराम मच गया। शहीद के पिता उदय सिंह टकटकी लगाए बेटे के शव को देखते रहे जबकि मां गुड्डी कंवर व पत्नी तमन्ना कुमारी बेहोश हो गईं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें संभाला। शहीद देशराज के बड़े भाई भोजराज सिंह की भी स्थिति खराब हो गई।

पिता को तिरंगा भेंट करते सेना के अधिकारी (फोटो-पत्रिका)

‘अंतिम जय हिंद मेरे भाई’

अंतिम संस्कार स्थल पर शहीद के पिता उदय सिंह व भाई भोजराज सिंह ने पुष्प चक्र अर्पित कर अपने लाडले को अंतिम विदाई दी। भोजराज सिंह ने सैल्यूट कर कहा- ‘अंतिम जय हिंद मेरे भाई’ तो वहां मौजूद लोगों की रुलाई फूट पड़ी।

बेटे को आखिरी सल्यूट देते पिता उदय सिंह (फोटो-पत्रिका)

सेना के जवानों ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर

अंतिम संस्कार में सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और पिता उदय सिंह को तिरंगा भेंट किया। शहीद के चचेरे भाई रवि सिंह ने मुखाग्नि दी। देशराज के पिता उदय सिंह ने कहा कि बेटा तो चला गया लेकिन सात पीढियों का सर गर्व से ऊंचा कर गया। भाई भोजराज सिंह ने बताया कि देशराज कभी भी अपनी सैलरी अपने पास नहीं रखता था बल्कि बड़े भाई भोजराज सिंह को भेज देता था जिससे कि घर की जरूरतें पूरी की जा सकें।

शहीद को श्रंद्धांजलि देने के लिए खड़े लोग (फोटो-पत्रिका)

पिता ने 3 दिन पहले ही भिजवाए थे लड्डू

पिता उदय सिंह ने बताया कि हमेशा उसकी ड्यूटी अति संवेदनशील क्षेत्र में रही। इससे पहले डोकलाम क्षेत्र में भी देशराज सिंह ने सेवा दी थी। 22 अप्रैल को शहीद के पिता उदय सिंह ने उसके लिए देसी घी के लड्डू बनवाकर भिजवाए थे। पिता उदय सिंह ने बताया कि उसकी बटालियन का साथी छुट्टी आया हुआ था जिसके हाथ उन्होंने लड्डू भिजवाए थे पर किसे पता था कि महज तीन दिन बाद ही उसकी शहादत की खबर आएगी।

मुखाग्नि देते शहीद के चचेरे भाई रवि सिंह (फोटो-पत्रिका)

देशराज के परिवार में सैन्य परंपरा

प्रगति बाल मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाकर अमर रहे के नारे लगाए। शहीद देशराज सिंह 2019 में भारतीय सेना में 3 ग्रेनेडियर में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वे अरुणाचल प्रदेश के रोचम क्षेत्र में तैनात थे, जहां 25 अप्रैल को अचानक हुए लैंडस्लाइड में वे वीरगति को प्राप्त हो गए। उनके परिवार में सैन्य परंपरा रही है, उनके बड़े भाई भोजराज भी भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि दादा भगवान सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं।