सोजत (पाली). क्षेत्र के करमावास पट्टा में चोरी के एक मामले में चेन्नई पुलिस की पूछताछ के बाद एक ज्वेलर ने विषाक्त खाकर सुसाइड कर लिया। इसकी भनक लगने पर दूसरे भाई ने भी विषाक्त खा लिया जिसे जोधपुर एम्स में भर्ती कराया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार चेन्नई के महावीर जैन ने पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया था। उक्त मामले में जो आरोपी थे उनके साथ मृतक का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हुआ बताया, जिसके बाद चेन्नई पुलिस उन्हें पूछताछ के नाम पर कई दिनों से परेशान कर रही थी।
घटना को लेकर किरणदेवी गुर्जर ने सोजत पुलिस थाने में रिपोर्ट दी थी कि 22 अप्रेल को सुबह महावीर जैन ने उसके पति को सोजत के मोड भट्टा के पास एक होटल पर बुलाया और कहा कि एक किलो सोना दो नहीं तो चोरी के झूठे मुकदमे में फंसाएंगे। उसने जान से मारने की भी धमकी दी। इस धमकी से डरकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली।
इससे पहले 21 अप्रेल को चेन्नई पुलिस के दो पुलिसकर्मी शिवा व गोपी शाम को उनके घर पर आए तथा विनोद को अपने साथ बगड़ी नगर थाने ले गए जहां पूछताछ के बाद रात करीब 8.30 बजे छोड़ा। किरण गुर्जर ने पुलिस को रिपोर्ट में बताया कि आत्महत्या करने से उसके पति ने घटना के वॉइस मैसेज बनाकर देवर बुधाराम के मोबाइल पर भेजे थे जो सुनकर बुधाराम ने भी घबराकर विषाक्त खा लिया, जिन्हें जोधपुर के एम्स में भर्ती कराया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार विनोद कुमार (24) व उनके भाई बुधाराम (22) निवासी केलवाद करमावास पट्टा गांव में सोने-चांदी का व्यवसाय करते थे। इनके पड़ोसी गांव के रहने वाले चोरों ने महावीर जैन की ज्वेलरी शॉप में चोरी की थी। जिसको लेकर महावीर ने मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में पुलिस चोरों को पकड़ नहीं पाई, लेकिन उन चोरों से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होने के चलते इन दोनों भाइयों को परेशान किया जा रहा था। चेन्नई की पुलिस ने उनके साथ मारपीट की एवं चोरी कबूल न करने पर उनकी जमीन कुर्क करने की धमकियां भी दी। इसके बाद बदनामी के डर से एक भाई ने जहर खाकर आत्म हत्या कर ली। सोजत थाना पुलिस ने शुक्रवार को मृतक का पोस्टमार्टम कराया और शव परिजनों के सुपुर्द किया। पुलिस ने मृतक की पत्नी की रिपोर्ट पर पांच जनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
घटना बेहद गंभीर और चिंताजनक
घटना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। प्रथम दृष्टया मामला केवल आत्महत्या का नहीं, बल्कि कथित मानसिक दबाव, धमकी और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। यदि वाकई पूछताछ के नाम पर किसी व्यक्ति को इस हद तक प्रताड़ित किया गया कि उसने अपनी जान दे दी, तो यह कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों के लिए एक बड़ा प्रश्न है। किसी भी जांच एजेंसी को कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करनी चाहिए। “धमकी देकर कबूलनामे” जैसी बातें यदि सही पाई जाती हैं, तो यह न्याय प्रणाली की साख को नुकसान पहुंचाती हैं। साथ ही, बिना पर्याप्त साक्ष्य के केवल ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के आधार पर किसी को आरोपी की तरह ट्रीट करना भी गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। इस घटना का एक और दुखद पहलू है—दूसरे भाई का भी भय और सदमे में आकर जहर खा लेना। यह दिखाता है कि परिवार पर मानसिक दबाव कितना गहरा था। ऐसी घटनाएं समाज में डर और अविश्वास का माहौल पैदा करती हैं।