सवाईमाधोपुर। पिछले करीब साढ़े सात दशकों से भी अधिक समय में यह पहला मौका है जब राजस्थान के जंगलों में चीते ने करीब दस दिन बिताए हैं और उसकी मौजूदगी अभी भी राजस्थान में बनी हुई है। गौरतलब है कि रणथम्भौर में पिछले करीब दस दिनों से चीते की लगातार मौजूदगी बनी हुई है।
वर्तमान में भी रणथम्भौर की फलौदी रेंज के जोन आठ में बना हुआ है और रणथम्भौर व कूनो दोनों की टीमें लगातार चीते की ट्रेकिंग और मॉनिटरिंग में जुटी हुई हैं।
भारत सरकार ने घोषित किया था विलुप्त
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार भारत में चीतों की संख्या लगातार घटने और बाद में जंगलों में चीतों की मौजूदगी के प्रमाण नहीं मिलने के कारण भारत सरकार की ओर से 1952 में भारत से चीते को विलुप्त घोषित कर दिया गया था।
2022-23 में फिर से शुरू हुई बसाने की कवायद
इसके बाद 2022-23 में केन्द्र सरकार की ओर से भारत के जंगलों में फिर से एक बार चीते को बसाने के लिए चीता प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इसके तहत नामिबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीते लाकर एमपी के कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए।
1951 में आखिरी बार दिखा था चीता
भारत में 1951 में आखिरी बार चीता नजर आया था। इसके बाद 1952 में सरकार ने भारत को चीता विलुप्त घोषित कर दिया था। इसके बाद 2022-23 में फिर से चीता प्रोटेक्ट शुरू हुआ। 17 सितम्बर 2022 को पहली बार 8 चीते कूनो लाए गए। इनमें 5 नर और 3 मादा शामिल थे। इसके बाद जनवरी 2023 में 12 चीता लाए गए।
इनका कहना है
करीब आठ दशक के बाद यह पहला मौका है जब रणथम्भौर में इतने लम्बे समय तक चीते की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह प्राकृतिक संतुलन और वन संरक्षण की दिशा से एक अच्छी खबर है।
-विष्णु गुप्ता, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर।
कूनो में रणथंभौर का टाइगर टी-2512 फिर दिखा
इधर, रणथंभौर टाइगर रिजर्व से निकलकर कूनो नेशनल पार्क को अपना ठिकाना बनाने वाला टाइगर टी-2512 बुधवार को एक बार फिर पर्यटकों के सामने आया। यह बाघ कूनो नेशनल पार्क के टिकटोली क्षेत्र में घूमते हुए फ्लाइंग कैट सफारी पर निकले पर्यटकों को नजर आया। बाघ के दिखने के बाद पर्यटकों ने उत्साहपूर्वक इसका वीडियो बनाया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर साझा किया। यह विशेष बाघ, टी-2512, पिछले लगभग तीन महीने से कूनी के टिकटोली क्षेत्र में ही अपना डेरा डाले हुए है। यह इसी क्षेत्र में लगातार घूम रहा है और अब इसने इस इलाके को अपनी टेरेटरी (क्षेत्र) के रूप में स्थापित कर लिया है।
विशेष बात यह है कि गत फरवरी से यह टिकटोली क्षेत्र में ही घूम रहा है। रणथंभौर से अपनी यात्रा शुरू करने के बाद, टाइगर टी-2512 को सबसे पहले जनवरी माह में श्योपुर जिले के सोईकला क्षेत्र के खेतों में देखा गया था। वहां से आगे बढ़ते हुए, यह वन्यजीव कूनो नेशनल पार्क के घने जंगलों में प्रवेश कर गया। कूनो में यह बाघ पहली बार 6 फरवरी को नजर आया था। फरवरी से लेकर अब तक, यह टाइगर टिकटोली क्षेत्र में ही कई बार पर्यटकों को दिखाई दे चुका है।