Workers Strike Warning: झालावाड़ के बकानी कस्बे में सफाई कर्मचारियों ने वेतन नहीं मिलने पर ग्राम पंचायत के प्रति आक्रोष जताया और विकास अधिकारी को हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी। सफाई कर्मियों ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
कर्मचारियों का कहना है कि चार माह पहले भी सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की थी। उस समय ग्राम पंचायत प्रशासन और कर्मचारियों के बीच सहमति बनी थी कि हर महीने की 1 से 7 तारीख के बीच वेतन राशि कर्मचारियों के बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी, लेकिन ग्राम पंचायत समझौते का पालन नहीं कर रही है।
कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कर्मचारियों ने विकास अधिकारी से जल्दी समाधान की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर उनकी मांगे पूरी नहीं हुई, तो वह सफाई कार्य बंद कर देंगे और हड़ताल पर चले जाएंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
विद्युत कर्मचारियों ने किया निजीकरण का विरोध
भवानीमण्डी. प्रदेश के विद्युत निगमों में प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में जयपुर विद्युत वितरण श्रमिक संघ झालावाड़ वृत के नेतृत्व में राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ ने नाराजगी जताई है। इन्होंने शासन सचिव ऊर्जा विभाग आरती डोगरा के नाम जयपुर विद्युत वितरण निगम सहायक अभियंता कार्यालय पर सहायक अभियंता मोहन लाल मेघवाल को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र ही कर्मचारियों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेने पर प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन चेतावनी दी।
ज्ञापन में बताया कि 12 अगस्त 2025 को ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विद्युत निगमों में लागू किए जा रहे विभिन्न निजीकरण मॉडल जैसे फ्रेंचाइजी, क्लस्टर, सीएलआरसी, एमबीसी एवं इनविट को रोकने एवं कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर सहमति बनी थी। उस बैठक में शासन स्तर पर आश्वासन भी दिया था कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद आज तक किसी भी मांग पर प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
संघ ने यह बताया कि 26 दिसंबर 2025 को भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले आयोजित प्रदेशव्यापी श्रमिक आक्रोश रैली एवं विशाल सभा में मुख्यमंत्री को विद्युत कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं से अवगत कराया था। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद विद्युत प्रशासन द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसके विपरीत अब जोधपुर डिस्कॉम को निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिसे संगठन ने हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।
वहीं निजीकरण की इस प्रक्रिया से न केवल कर्मचारियों की नौकरी असुरक्षित होगी, बल्कि विद्युत सेवाओं की गुणवत्ता और आम उपभोक्ताओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। संगठन का मानना है कि अलग-अलग नामों से निजीकरण लागू करना केवल कर्मचारियों के हितों को कमजोर करने का प्रयास है। जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संगठन ने आंदोलन की रूपरेखा में बताया कि यदि जल्द ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 6 मई को जिला एवं वृत स्तर पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इसके बाद 20 मई को डिस्कॉम मुख्यालय स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होंगे। यदि इसके बावजूद भी समाधान नहीं निकलता है तो 10 जून को जयपुर स्थित विद्युत भवन पर प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी औद्योगिक अशांति की पूरी जिम्मेदारी विद्युत प्रशासन की होगी।
ज्ञापन के साथ प्रस्तुत मांगपत्र में विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 को वापस लेने और विद्युत क्षेत्र में लागू किए जा रहे सभी प्रकार के निजीकरण मॉडल पर तत्काल रोक लगाने की है। इसके अलावा स्थायी प्रकृति के कार्यों में ठेकाप्रथा समाप्त कर कार्यभार के अनुसार सभी कैडरों में नई भर्ती करने की मांग की गई है।
संघ ने पुरानी पेंशन योजना से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया और कहा कि जिन कर्मचारियों पर ओपीएस लागू है। उनसे ईपीएस-95 के तहत जमा राशि की वसूली नहीं की जाए और राज्य सरकार द्वारा जारी ओपीएस विरोधी आदेशों को तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही तकनीकी कर्मचारियों को समयबद्ध पदोन्नति, फिक्सटर्म योजना का नकद लाभ, उच्च ग्रेड पे और जोखिम भत्ता देने की मांग भी रखी।
कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी विस्तार से उठाया है। इसमें आरजीएचएस योजना के तहत सभी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को राज्य सरकार के समान चिकित्सा सुविधा देने, पेंशन, ग्रेच्युटी और मेडिकल फंड में नियमित अंशदान सुनिश्चित करने तथा संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन और सुरक्षा कानूनों का लाभ देने की मांग की।
इसके अतिरिक्त निगमों में पदोन्नति के अवसर बढ़ाने, विभिन्न पदों का सृजन करने, लंबित डीपीसी को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, बोनस और महंगाई भत्ते का भुगतान करने, तकनीकी कर्मचारियों को वर्दी भत्ता, आवास सुविधा और उच्च वेतनमान देने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी मांगपत्र में शामिल हैं।
संघ का कहना है कि लगातार उपेक्षा के चलते कर्मचारियों में असंतोष चरम पर है और यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला तो इसका असर विद्युत व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। संगठन ने सरकार से अपील की है कि वह कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय ले। ताकि टकराव की स्थिति से बचा जा सके।
इस दौरान भारतीय मजदूर संघ के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष बालमुकुंद मेघवाल, घनश्याम गुप्ता, खैमराज गुप्ता, विवेक शर्मा,उपखण्ड अध्यक्ष अनिल नरबान,सचिन शर्मा, रमेशचंद्र,रफीक मोहम्मद, ललित भावसार,अशोक बैरवा, आदि अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।