World Earth Day Special: बीकानेर. पर्यावरण संरक्षण की बात जहां दुनिया भर में अभियानों और नारों तक सीमित है, वहीं बीकानेर की धरती पर एक अनोखा प्रयोग साकार हुआ है। यहां एक किसान-व्यवसायी ने अपनी कृषि भूमि पर ‘स्वस्तिक’ का ऐसा विराट स्वरूप उकेरा, जो न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश भी देता है।
विचार से साकार तक: धरती मां को समर्पण
साल 2010 में बीकानेर के व्यवसायी ललित कुमार नाहटा के मन में विचार आया कि जिस धरती ने उन्हें समृद्ध किया, उसे कुछ स्थायी रूप में सम्मान दिया जाए। इसी सोच से जयपुर रोड स्थित ‘हरखमणि एस्टेट’ की भूमि पर स्वस्तिक के निर्माण की परिकल्पना जन्मी। दिल्ली के आर्किटेक्ट सुधीर गुप्ता ने इसकी डिजाइन तैयार की, जबकि जयपुर की सर्वे टीम ने जमीन का मापन किया। वर्ष 2011 में इसे पूरी सटीकता के साथ 90 डिग्री कोणों में उकेरा गया। खास बात यह रही कि भूमि का चयन भी वास्तु के अनुरूप किया गया।दक्षिण-पश्चिम ऊंचा और उत्तर-पूर्व नीचा।
आकार में भी विराट
यह स्वस्तिक करीब 900 गुणा 900 फीट (लगभग 29.75 बीघा) क्षेत्र में फैला है, जबकि बाहरी सीमाओं सहित इसका विस्तार 1020 गुणा 1020 फीट (करीब 38.21 बीघा) तक पहुंचता है। इसे दुनिया के सबसे बड़े स्वस्तिक स्वरूपों में से एक गिना जाता है।
चारों छोर पर ‘ढाणियां’, बीच में जीवन
स्वस्तिक के चारों सिरों पर स्टार आकार के बिंदु बनाए गए, जिनके केंद्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त चार ढाणियां निर्मित की गईं। इनका उपयोग कृषि प्रबंधन और निगरानी के लिए किया जाता है। पूरे क्षेत्र को हरियाली से आच्छादित किया गया है। करीब 5 हजार अनार के पेड़ों के साथ आंवला, कीनू, बेर सहित कई फलों की खेती की जा रही है। यह स्थान अब न केवल खेती का केंद्र है, बल्कि पक्षियों और वन्य जीवों के लिए सुरक्षित आश्रय भी बन चुका है।
आसमान से दिखता अद्भुत नजारा
नाहटा बताते हैं कि बीकानेर के ऊपर से गुजरने वाली फ्लाइट्स से यह स्वस्तिक स्पष्ट नजर आता है। रेलवे स्टेशन और जिला उद्योग संघ के म्यूजियम में भी इसकी तस्वीर प्रदर्शित है, जो इस अनूठे प्रयोग की पहचान बन चुकी है। हाल ही में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इस स्वस्तिक स्थल का अवलोकन किया और इसकी सराहना की।