Success Story : सफलता के लिए मेहनत और लगन से कहीं ज्यादा जरूरी हार न मानने की जिद होती है। यह बात प्रीक्षित सिंह राजपुरोहित पर सटीक बैठती है। आज के दौर में कई युवा असफल होने पर टूट जाते हैं। वहीं प्रीक्षितसिंह ने एसएससी परीक्षा में 13 बार असफल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार परीक्षा उत्तीर्ण कर वे भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुए और चेन्नई में अपनी जॉइनिंग दे दी।
प्रीक्षितसिंह की कहानी संघर्ष और अटूट विश्वास की है मिसाल
13 बार असफल होने के बाद 14वीं बार में वायु सेना चयन परीक्षा पास की। इसके बाद असिस्टेंट कमांडेंट कॉस्ट गार्ड व थल सेना परीक्षा पास कर अपना सपना पूरा किया। डूंगरपुर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के डिप्टी रतनसिंह राजपुरोहित के पुत्र प्रीक्षितसिंह की कहानी संघर्ष और अटूट विश्वास की मिसाल है।
मूलतः पाली जिले के सुमेरपुर के हैं निवासी
मूलतः पाली जिले के सुमेरपुर खिदारा के रहने वाले हैं। प्रारंभिक शिक्षा उदयपुर में हुई। जयपुर से बीएससी और मैथ्स में एमएससी की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने भारत माता की सेवा का लक्ष्य निर्धारित किया और नोएडा में कोचिंग के साथ सेना भर्ती की तैयारी शुरू की। इसी दौरान उनका चयन सीआरपीएफ में सब-इंस्पेक्टर के पद पर हो गया। पिता के पुलिस विभाग से जुड़ाव और अनुशासन को देखते हुए उन्होंने नौकरी जॉइन की। ट्रेनिंग के बाद उन्हें मणिपुर की 71वीं बटालियन में नियुक्ति मिली।
6 साल, एक जिद
25 वर्षीय प्रीक्षित ने इस मुकाम को हासिल करने के लिए 6 साल तक कड़ा संघर्ष किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए अंग्रेजी में संदेश लिखा। जिसमें वे कहते हैं कि 6 साल का सपना 13 बार परीक्षा देने की कहानी। 13 बार फेल होने के बाद भी निरंतर प्रयासों से सफलता मिली। अपने सपनों के लिए लड़ो और अपना सब कुछ झोंक दो।
नौकरी के साथ जारी रखा सपना
सीआरपीएफ में सब-इंस्पेक्टर रहते हुए भी प्रीक्षित के मन में लेफ्टिनेंट बनने की इच्छा कम नहीं हुई। कठिन ड्यूटी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने निरंतर अध्ययन जारी रखा। जैसे ही उनके थल सेना में ऑफिसर बनने की सूचना पैतृक गांव पहुंची, क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों, मित्रों और ग्रामीणों ने खूब जमकर जश्न मनाया। एकदूसरे को ढेरो बधाइयां दी।