विजय दिवस पर उठी नहीं निगाह, पेंटागन टैंक की अनदेखी

श्रीगंगानगर. भारत-पाकिस्तान के बीच हुए 1971 युद्ध में भारतीय सेना की वीरता का प्रतीक पेंटागन टैंक स्थल अब जिला प्रशासन की अनदेखी से इतना अधिक जर्जर हो गया है कि यह टैंक कभी भी गिर सकता है। सोमवार को इस युद्ध के 54 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में विजय दिवस पर भारतीय सेना की वीरता के इस प्रतीक टैँक स्थल पर रंग-रोगन तो दूर वहां सफाई तक नहीं कराई। तत्कालीन जिला कलक्टर पीसी किशन के आदेश पर नगर परिषद अमले ने 7 नवम्बर 2016 को जिला परिषद की चारदीवारी से निकालकर इस टैँक को शहर के ह्रदय स्थल भारत माता चौक पर स्थापित करवाया था। टैँक जिस फाउंडेशन पर स्थापित किया गया यह फाउंडेशन अब धीरे धीरे धंसने लगा है। विदित रहे कि इस टैँक को तत्कालीन मुख्यमंत्री बरकतुल्ला खां को श्रीगंगानगर शहर के लिए लेफ्टीनेन्ट जनरल टी.एन. रैना द्वारा समर्पित किया गया। 10 जुलाई 1972 की तिथि के अंकित इस शिला पट्टिका को स्थापित किया गया था, यह शिला पटि़टका फिलहाल जिला परिषद परिसर के स्टोर में कबाड़ के रूप में रख दिया गया।

जीर्णोद्धार की बजाय टालता रहा प्रशासन

गहलोत सरकार के शासन में तत्कालीन विधायक राजकुमार गौड़ ने इस टैँक स्थल को भव्य रूप से देने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया था। लेकिन हर बार जिला प्रशासन इसकी अनदेखी करता रहा लेकिन आज तक एक रुपया इस स्थल पर खर्च नहीं किया गया। इधर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी एससी विभाग के पूर्व प्रदेश सचिव अधिवक्ता संजय धारीवाल ने जिला सतर्कता कमेटी में इस टैंक का मामला उठाया था। धारीवाल का कहना है कि इस टैँक को स्मारक के रूप में विकसित कर सेल्फी प्वाइंट बनने से लोगों में इस टैँक के प्रति लोगों में आकर्षण बढ़ेगा।

इसलिए शहरवासियों को मिला था यह टैँक

करीब 53 साल पहले भारतीय सेना ने पाकिस्तान के नेस्ताबूद कर दिए थे, वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को करारी मात देकर भारतीय सेना ने पाकिस्तान सेना की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे करीब एक सौ पेंटागन टैंक को हासिल किए थे। इन टैंकों में से एक टैंक भारतीय सेना ने जिला प्रशासन के सुपुर्द किया था ताकि इस टैंक को देखकर हर भारतीय के मन में देश प्रेम का जज्बां कायम रह सके।
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