कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं हटाया गया सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, पार्षद ने हॉस्पिटल बनाने की मांग

जयपुर। राजधानी जयपुर में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। जिसमें निगम की लापरवाही सामने आ रही है। कोर्ट के आदेश के बाद भी निगम की ओर से अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। नगर निगम हेरिटेज के हवामहल – आमेर जोन स्थित वार्ड 13 के जयसिंहपुरा खोर में 4 बीघा से ज्यादा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मामला है। जयसिंहपुरा खोर की खसरा नंबर 314/1 सरकारी भूमि पर 2011 में पीटी सर्वे कर नगर निगम द्वारा तार बाउंड्री कर नगर निगम की संपत्ति का बोर्ड लगाया गया था। लेकिन धीरे-धीरे अतिक्रमणकारियों ने सरकारी जमीन पर कब्जा करना शुरू किया। अब यहां पर कई अवैध निर्माण हो चुके है।

सामाजिक कार्यकर्ता युगल किशोर भारद्वाज की याचिका पर साल 2022 में हाई कोर्ट की डबल बेंच ने इस सरकारी जमीन से भूमाफियाओं के अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए थे। लेकिन अब तक नगर निगम प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण को नहीं हटाया गया है। स्थानीय पार्षद सुरेश सैनी ने कहा कि नगर निगम प्रशासन पूरी तरह मूक दर्शक बन चुका है। अब तक सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध अतिक्रमण के खिलाफ दर्जनों शिकायत दे चुका हूं। लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस मामले को लेकर मैंने क्षेत्रीय विधायक बालमुकुंद आचार्य और कार्यवाहक मेयर कुसुम यादव से भी शिकायत की है। जिन्होंने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ऐसे में अगर इस मामले का समाधान नहीं हुआ और नगर निगम टीम द्वारा अवैध निर्माण को ध्वस्त कर सरकारी जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया। तो आम जनता के साथ मैं नगर निगम प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठूंगा।

सैनी ने कहा कि जयसिंहपुर इलाके में कोई भी सरकारी हॉस्पिटल नहीं है। आम जनता को इलाज के लिए या तो गणगौरी या फिर सवाई मानसिंह हॉस्पिटल जाना पड़ता है। जो इस क्षेत्र से काफी दूर है। जबकि जयपुर दिल्ली हाईवे से नजदीक होने की वजह से यहां आए दिन हादसे होते हैं। ऐसे में इस पूरे क्षेत्र की जनता यही चाहती है कि इस सरकारी जमीन से अतिक्रमण को हटाकर यहां हॉस्पिटल का निर्माण किया जाए। ताकि जयसिंहपुरा खोर में रहने वाली लाखों की आबादी को राहत मिल सके।

इनका कहना है…

सेटलमेंट विभाग को जिला कलेक्टर के माध्यम से अनुरोध किया है कि इस जमीन की मौके पर नाप करा कर जानकारी से अवगत कराएं। ताकि कोर्ट के आदेशों की पालना की जा सके। अभी तक सेटलमेंट डिपार्टमेंट से कोई जवाब नहीं आया है।

अरूण कुमार हसीजा, आयुक्त, निगम

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