सुनियोजित तरीके से हो रहा धर्मांतरण, हमारी आस्था और संस्कृति पर चोट- धनखड़

उदयपुर. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देश में जनजाति समुदाय के धर्मांतरण पर चिंता जताते हुए इसे रोकने की जरुरत बताई है। वे शनिवार को उदयपुर जिले के कोटड़ा में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग एवं वनवासी कल्याण परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जनजाति गौरव महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को जबरन लोभ लालच देकर सुनियोजित तरीके से उनका धर्म बदलकर आस्था और संस्कृति पर चोट की जा रही है। बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर कोटड़ा के डॉ. विजया आप्टे माध्यमिक विद्या मंदिर परिसर में समारोह में उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण का हितैषी कोई है तो वह आदिवासी समाज है। जिन्हें हम भूल चुके थे, उन वीर आदिवासी बिरसा मुंडा का आज सम्मान हो रहा है। अंग्रेजों के खिलाफ उनका नारा था, अबुआ राज अबुआ राज, हमारा शासन, हमारा शासन यह कहने वाले बिरसा मुंडा थे। धनखड़ ने कहा कि अब भारत बदल रहा है। आज देश के सबसे बड़े राष्ट्रपति पद पर जनजाति महिला द्रोपदी मुर्मू है और एक किसान का बेटा उप राष्ट्रपति है। इतिहास में पहली बार संसद परिसर में जननायक बिरसा मुंडा की स्टेच्यू पर सबसे पहले द्रोपदी मुर्मू ने माल्यार्पण किया। आदिवासियों के लिए इससे बड़ी गर्व की बात क्या हो सकती है। स्वतंत्रता संग्राम को याद करते हुए बोले कि इतिहासकार कैसे भूल गए आजादी की 1913 की जंग मानगढ़ धाम को, जहां आदिवासियों ने राष्ट्र की आजादी के लिए 1500 से अधिक आहुतियां दी। इतना बड़ा बलिदान स्वतंत्रता संग्राम में कहीं देखने को नहीं मिलेगा। अब हर वर्ष 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाया जाएगा। राष्ट्रवाद हमारा धर्म है। इसकी मिसाल बिरसा मुंडा है। उन्हें भगवान कहा गया है, उनका लक्ष्य जमीन से जुड़ा था। कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने भी समारोह को संबोधित किया। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति की पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, वनवासी कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री भगवान सहाय, पूर्व कुलपति थावर चंद डामोर, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा मौजूद रहे।

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