खाली पड़ी रही अधिकारियों की कुर्सियां, फरियादी दिखे परेशान

-महत्वपूर्ण पद रिक्त होने के चलते प्रशासन की दिखी मात्रा खाना पूर्ति

-पंचायत समिति सभागार में जनसुनवाई का आयोजन

dholpur, बाड़ी. प्रत्येक माह के दूसरे गुरुवार को होने वाली जनसुनवाई की परंपरा इस बार भी निभाई गई। जिसके तहत बाड़ी पंचायत समिति सभागार में जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन हुआ, मगर जनसुनवाई मात्र पूरी तरह से खाना पूर्ति ही नजर आई। क्योंकि बाड़ी उपखंड के तमाम महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं जिसके चलते इस जनसुनवाई में किसी भी प्रकार का उत्साह और फरियादियों में संतोष देखने को नहीं मिला।

जनसुनवाई में खाली रहीं कुर्सियां

जनसुनवाई के दौरान तमाम अधिकारियों की कुर्सियां खाली देखी गईं जिसके चलते फरियादी मायूस होते हुए देखे गए। तमाम शिकायतों का निस्तारण इन्हीं अधिकारियों के अधीन होता है, मगर महत्वपूर्ण पद रिक्त होने के चलते इन कुर्सियों पर कोई नहीं बैठा ऐसे में पीडि़त लोग किसे अपनी समस्या बताएं। उपखंड अधिकारी, तहसीलदार के पद लंबे समय से रिक्त हैं जबकि अधिशासी अधिकारी पर कार्यवाहक के रूप में एक अधिकारी को लगाया गया है मगर वह भी इसमें अनुपस्थित रहे।

फरियादियों की संख्या भी दिखी कम

इस बार जहां महत्वपूर्ण अधिकारियों की कुर्सियां खाली रही तो वहीं फरियादियों की संख्या भी कम देखने को मिली। जो फरियादी पहुंचे तो उनसे भी जब जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने ऑफ रिकॉर्ड बताया कि जब प्रशासन के महत्वपूर्ण पद खाली ही है तो वह यहां आकर अपना समय क्यों खराब करें उन्हें भी पता है कि यह मात्र खाना पूर्ति की जा रही है।

देर से आए कुछ अधिकारी, थोड़ी देर बैठ वापस लौटे

जो पद भरे हुए हैं वह अधिकारी भी समय पर नहीं पहुंचे और जब पंचायत समिति सभागार में पहुंचे भी तो मात्र 15 से 20 मिनट बैठकर वापस अपने-अपने कार्यालय को लौट गए। ऐसे में फरियादियों ने ऐसे अधिकारियों पर भी प्रश्न चिह्न खड़े किए।

पिछली शिकायतों का भी नहीं हुआ निस्तारण

उक्त जनसुनवाई के दौरान ऐसे भी फरियादी मिले जो पिछली जनसुनवाईयों के दौरान अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे और उन्हें तमाम अधिकारियों से आश्वासन भी मिला था, मगर एक से डेढ़ महीने होने के बावजूद भी उनकी शिकायतों पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। जिसे लेकर वह अपने लंबित प्रकरणों की जानकारी लेने के लिए उक्त जनसुनवाई में पहुंचे लेकिन वहां कोई अधिकारी न होने के चलते वह भी मायूस होकर लौटे।

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