Nautapa 2026 Prediction: आज से नौतपा शुरू, भीषण गर्मी के बीच होगी आंधी-बारिश, मानसून का आया अपडेट, IMD अलर्ट जारी

IMD Alert For Nautapa 2026: प्रचंड गर्मी के लिए खास नौ दिवसीय नौतपा की शुरुआत सोमवार से हो रही है। वर्ष 1980 के बाद फिर से 25 मई को इसकी शुरुआत हो रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस साल शुरुआती छह दिनों में सूर्यदेव के तेवर हावी रहेंगे। ऐसे में आमजन को परेशानी होगी। 29 मई तक रेगिस्तानी इलाकों में पारा 50 डिग्री तक पहुंच सकता है। 30 मई से तेज आंधी और हल्की बारिश की संभावना है। नौतपा के आखिरी तीन दिनों में हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं।

शुभ संकेत: मानसून के मेघ रहेंगे मेहरबान

ज्योतिषियों के मुताबिक नौतपा में गर्म हवाएं चलने और तापमान में वृद्धि होने की उम्मीद है। हालांकि सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में परिभ्रमण काल 13 दिनों से अधिक का भी हो सकता है, लेकिन पहले नौ दिन को ही नौतपा के रूप में माना जाता है। इन्हीं दिनों के आधार पर आगामी चार महीनों की वर्षा ऋतु की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। पूरे नौ दिन यदि नौतपा खंडित न हो तो मानसून के मेघ भी मेहरबान रहते हैं।

दोपहर में घर में ही रहें

प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. निधि शर्मा ने बताया कि दोपहर 12 से 3 बजे तक गर्मी का ज्यादा असर रहेगा। ऐसे में लोग जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें। दिनभर पर्याप्त पानी पीएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। फल, सत्तू खाएं। तला, भुना और मसालेदार खाना न खाएं। सनस्क्रीन क्रीम और चश्मे का इस्तेमाल करें। व्यायाम करने से बचें। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर ध्यान रखें।

47 डिग्री तक पहुंच सकता तापमान

मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के मुताबिक आगामी तीन से चार दिन तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क बना रहेगा। इस दौरान तेज धूलभरी हवाएं 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है। साथ ही तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है। विभाग ने चेतावनी दी है कि 26 और 27 मई को पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कई स्थानों पर तीव्र हीटवेव की स्थिति बनने की भी आशंका है।

राज्यों में अलग-अलग परंपराएं

राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर भारत के ग्रामीण अंचलों में नवतपा को लेकर कई लोक परंपराएं प्रचलित हैं। इनमें घर की देहरी पर जल छिड़कना, पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना और तुलसी को छांव देना आम है। महिलाएं घड़े का जल राहगीरों को पिलाती हैं। आम जनमानस में यह विश्वास गहरा है कि यदि नवतपा में पर्याप्त तपन होती है, तो मानसून अच्छा रहता है। किसान इसे शुभ संकेत मानते हैं। बुजुर्ग कहते हैं, ‘तपे नवतपा, तो बरसे मेघ।’

सूरज के सात अश्व और धरती का ‘अग्नि तप’

ज्योतिषाचार्य पं.मोहनलाल शर्मा के मुताबिक लोक मान्यता में नौतपा को ‘सूरज के घोड़ों की दौड़’ कहा जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में सूर्यदेव अपने सात अश्वों के साथ पूरे वेग से आकाश में भ्रमण करते हैं। यही वजह है कि धरती पर गर्मी अपने चरम पर पहुंचती है, हवाएं अंगारे जैसी लगती हैं और प्रकृति अग्नि तप से गुजरती है। बुजुर्ग इसे प्रकृति का शुद्धिकरण काल भी मानते हैं।

राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित उत्तर भारत के ग्रामीण अंचलों में नौतपा केवल मौसम नहीं, बल्कि लोकजीवन और सेवा भाव से भी जुड़ा पर्व माना जाता है। जीवदया के लिए परिंडे बांधना, पेय चीजों का वितरण करना, जलसेवा, घरों की देहरी पर पानी का छिड़काव, हरियाणी के संरक्षण के लिए आगे आना।

‘तपे नवतपा, तो बरसे मेघ’

लोककलाकार राजेंद्र बाजिया ने बताया कि ग्रामीण अंचलों में आज भी यह कहावत खूब प्रचलित है—‘तपे नवतपा, तो बरसे मेघ।’ अन्नदाता मानते हैं यदि नौतपा में तेज गर्मी पड़े तो मानसून अच्छा रहता है और खेतों में भरपूर फसल होती है। इसलिए भीषण गर्मी के बावजूद अन्नदाता इसे शुभ संकेत के रूप में देखते हैं।