राजस्थान में हर दिन 20 बच्चे लापता, सबसे ज्यादा बेटियां गायब, NCRB रिपोर्ट में खुलासा

International Day of Missing Children: राजस्थान में 2024 के दौरान हर रोज औसतन 20 बच्चे अपने घरों से गायब हो गए। साल भर में कुल 7,198 बच्चे लापता हुए और इनमें से 84 प्रतिशत से अधिक लड़कियां थी। यह आंकड़ा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 की रिपोर्ट से सामने आया है। राजधानी जयपुर में भी स्थिति चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार जयपुर के पांचों पुलिस जिलों-उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और ग्रामीण में कुल 879 बच्चे लापता हुए।

यानी राजधानी जयपुर में औसतन हर रोज 2 बच्चे अपनों से बिछड़ गए। आंकड़े जिलों की रिकवरी दर 71.9 प्रतिशत दर्शाते हैं। यानी अनुमानित रूप से करीब 251 बच्चे अब भी गुम हैं। इन बच्चों में 632 लड़कियां और 247 लड़के थे। यानी कुल लापता बच्चों में 72 प्रतिशत लड़कियां हैं।

देशभर में 98 हजार से अधिक बच्चे लापता

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में कुल 98,375 बच्चे लापता हुए यानी हर दिन औसतन 269 बच्चे। हालांकि वर्ष 2024 में ही 98,826 बच्चे वापस मिले या खोजे गए। इस आंकड़े में पिछले वर्षों के लंबित मामलों में मिले बच्चे भी शामिल हैं। इसके बावजूद 48,349 बच्चे अब भी गायब हैं। यानी देश में हजारों परिवार आज भी अपने बच्चों की राह देख रहे हैं।

गुम बच्चों के आंकड़े

पुलिस जिलाकुल लापता बच्चेलड़केलड़कियांलड़कियों का %वापस मिले*अब भी लापता*रिकवरी दरजयपुर उत्तर1292710279%983176.24%जयपुर दक्षिण1925313972%1236963.90%जयपुर पूर्व2286915969%1448463.30%जयपुर पश्चिम2246316172%1705475.67%जयपुर ग्रामीण106357167%931387.48%कुल87924763272%62825171.9%

जब एक बच्चे की गुमशुदगी ने बदल दी दुनिया

25 मई, 1979 को न्यूयॉर्क के सोहो इलाके में 6 साल का एटन पैट्ज स्कूल बस स्टॉप के लिए निकला और फिर कभी घर नहीं लौटा। उसके पिता ने जो तस्वीरें बांटी, वे पूरे अमरीका में दूध के डिब्बों पर छपने लगीं और यहीं से ‘मिल्क कार्टन किड्स’ आंदोलन की शुरुआत हुई। इसके बाद ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन’ की स्थापना हुई। एटन की याद में हर साल 25 मई को ‘इंटरनेशनल डे ऑफ मिसिंग चिल्ड्रन’ मनाया जाता है।