NEET 2026 पेपर लीक कांड ने न केवल देश के लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटकाया है, बल्कि राजस्थान के एक होनहार छात्र प्रदीप मेघवाल की जान भी ले ली है। परीक्षा रद्द होने के सदमे और अवसाद में आकर प्रदीप द्वारा सुसाइड किए जाने के बाद पूरे मारवाड़ और शेखावाटी क्षेत्र में जबरदस्त शोक और भयंकर जन-आक्रोश का माहौल बना हुआ है।
इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और युवाओं की आवाज को बुलंद करने के लिए कांग्रेस के कद्दावर नेता सचिन पायलट आज खुद झुंझुनूं के गुढ़ागौड़जी पहुंचे। उन्होंने न केवल पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें गले लगाया, बल्कि मीडिया के सामने आकर सूबे की भाजपा सरकार की नीयत और पुलिसिया कार्रवाई पर ऐसे सुलगते सवाल दाग दिए।
राहुल गांधी के फोन कॉल के बाद पायलट की एंट्री
प्रदीप मेघवाल के सुसाइड की गूंज अब सीधे दिल्ली तक पहुंच चुकी है। सचिन पायलट के झुंझुनूं पहुंचने से पहले कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने पीड़ित परिवार से फोन पर सीधी बातचीत की थी।
राहुल गांधी ने दिया भरोसा: राहुल गांधी ने फोन पर रोते हुए परिजनों से कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा देश और कांग्रेस परिवार उनके साथ खड़ा है। वे संसद से लेकर सड़क तक इस पेपर लीक माफिया और अपराधियों के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।
गले लगाकर रो पड़े पायलट: जैसे ही सचिन पायलट गुढ़ागौड़जी में प्रदीप के घर पहुंचे, माहौल बेहद गमगीन हो गया। पायलट ने प्रदीप मेघवाल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके बुजुर्ग माता-पिता व भाई-बहनों को गले लगाकर ढांढस बंधाया।
‘सरकार कुछ छुपाना चाहती थी’
पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद जब सचिन पायलट मीडिया से मुखातिब हुए, तो उनके तेवर बेहद आक्रामक थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब पुलिस अधिकारी खुद मान रहे थे कि गड़बड़ी हुई है, तो मामले को दबाने की कोशिश क्यों की गई?
सचिन पायलट का वो बयान : “जब सीबीआई (CBI) अब इस मामले में एफआईआर दर्ज कर रही है, तो मेरा सरकार से सीधा सवाल है कि जब शुरुआत में ही यहां पर 14-15 लोग रंगे हाथों पकड़े गए थे, तो पहली बार पकड़े जाने के बाद भी किसके दबाव में, और किस राजनीतिक कारण से आपने एफआईआर दर्ज नहीं करी? जब आपके बड़े पुलिस अधिकारी खुद ऑन-रिकॉर्ड बोल रहे हैं कि धांधली हुई है, फिर भी सरकार ने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई? इसका सीधा और साफ मतलब यही है कि सरकार कुछ न कुछ बहुत बड़ा छुपाना चाहती थी और बड़े मगरमच्छों को बचाना चाहती थी।”
प्रदीप के परिजनों ने पेपर माफियाओं पर सख्त कार्रवाई के साथ पेपरलीक ना हो इसके लिए सख्त कानून की मांग रखी। जिस पर राहुल गांधी ने आश्वासन दिया कि वो इस दुख की घड़ी में उनके साथ हैं। परिजन का कहना है कि प्रदीप तीन साल से सीकर में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था और इसी साल पेपर अच्छा हुआ था। नीट रद्द होने के बाद से पिछले चार दिन से वह गहरे अवसाद में था। प्रदीप माहिच तीन बहनों का इकलौता भाई था।