राजस्थान में मई महीने की कड़कड़ाती धूप और रिकॉर्ड तोड़ पारे के बीच अब प्रदेश की जनता के सामने सबसे बड़ा संकट पानी का खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार इस समय कानून व्यवस्था और प्रशासनिक फेरबदल में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता अशोक गहलोत ने आमजन से जुड़े बुनियादी मुद्दे को उठाकर सरकार की नींद उड़ा दी है।
गहलोत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक बेहद गंभीर और चेतावनी भरा बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने जोधपुर शहर के भीतर चल रहे भयंकर पेयजल संकट को उजागर करते हुए इसे सरकारी कुप्रबंधन का नतीजा बताया है।
’20 लाख जनता प्यास की कगार पर‘
Jodhpur Water Crisis – Demo PIC
जोधपुर शहर को पानी सप्लाई करने वाले मुख्य जलाशयों- कायलाना और तख्तसागर की स्थिति इस समय बेहद नाजुक बनी हुई है।
खतरे का निशान: आधिकारिक और स्थानीय रिपोर्टों के हवाले से अशोक गहलोत ने दावा किया है कि इन दोनों प्रमुख बांधों में अब केवल दो दिनों की जरूरत का पानी ही बचा हुआ है।
भयावह हुए हालात: जोधपुर और उसके आस-पास के इलाकों की करीब 20 लाख की आबादी इस समय गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ी है। शहर के कई मोहल्लों में पिछले कई दिनों से पानी की सप्लाई नहीं हुई है, जिसके कारण जनता में त्राहि-त्राहि मची हुई है।
त्राहि-त्राहि मचा रहा अकाल: टैंकर माफिया इस स्थिति का फायदा उठाकर आम लोगों से मनमाना दाम वसूल रहे हैं, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।
‘अब तक क्या कर रहा था जलदाय विभाग?‘
Ashok Gehlot -File PIC
पूर्व मुख्यमंत्री ने सीधे जलदाय विभाग (PHED) के अधिकारियों और सरकार की नीति पर उंगली उठाई है। उन्होंने इसे पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता और पूर्व तैयारी का अभाव करार दिया है।
गहलोत ने ट्वीट कर पूछा, “सबसे बड़ा सवाल यह है कि जलदाय विभाग अब तक क्या कर रहा था? क्या यह पूर्व तैयारी का अभाव नहीं है? क्या जल प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई? आज जब जल संकट सामने खड़ा है तो जवाबदेही कौन लेगा? जनता को इस भीषण गर्मी में प्यासा छोड़ देना बेहद अमानवीय है।”
सांसद और स्थानीय विधायकों को भी घेरा
अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर केवल जयपुर में बैठी सरकार को ही नहीं घेरा, बल्कि जोधपुर के स्थानीय भाजपा जनप्रतिनिधियों को भी उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जोधपुर के वर्तमान सांसद और शहर के तमाम भाजपा विधायकों को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए।
गहलोत के अनुसार, इन स्थानीय नेताओं का यह कर्तव्य है कि वे तुरंत मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री को जोधपुर की इस ग्राउंड रियलिटी से अवगत करवाएं, ताकि समय रहते इमरजेंसी वॉटर रूट या ट्रेनों के जरिए पानी मंगवाकर समस्या का तुरंत और ठोस समाधान किया जा सके।
राजस्थान में बढ़ रहा ‘वॉटर क्राइसिस’?
Water crisis – File PIC
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस साल पश्चिमी राजस्थान में प्री-मानसून की गतिविधियों में कमी और इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) में समय पर हुए क्लोजर (नहर बंदी) के सही प्रबंधन न होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
मैनेजमेंट फेलियर: नहर बंदी के समय जो बैकअप स्टोरेज बनाया जाना चाहिए था, अधिकारियों की लापरवाही के कारण वह खाली रह गया।
गर्मी का टॉर्चर: तापमान 45 डिग्री के पार जाने से जलाशयों में पानी का वाष्पीकरण भी तेजी से हुआ है, जिससे संकट उम्मीद से पहले आ गया।
राजनीति से ऊपर उठकर प्यास बुझाना जरूरी
Congress BJP
जोधपुर हमेशा से राजस्थान की राजनीति का एक पावर सेंटर रहा है। ऐसे में अशोक गहलोत ने ‘जल-आपातकाल’ मुद्दे को उठाकर भजनलाल सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस चेतावनी के बाद क्या तुरंत कोई हाई-लेवल मीटिंग बुलाती है या फिर जोधपुर की जनता को इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए ऐसे ही संघर्ष करना पड़ेगा।