रेगिस्तान की तपती गर्मी में लोगों के लिए ‘वरदान’ बनी यह एक चीज, एक्सपर्ट भी मान रहे हैं इसे जीवन रक्षक

जैसलमेर: रेगिस्तान में हीटवेव का असर अब केवल तापमान तक सीमित नहीं रहा। बल्कि यह दैनिक जीवन की गतिविधियों को भी प्रभावित कर रहा है। लगातार बढ़ते तापमान और तेज धूप के बीच शहर में पेड़ों की छांव एक प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम के रूप में उभर रही है, जो लोगों को राहत प्रदान कर रही है। भीषण गर्मी में खुले क्षेत्रों में पैदल चलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में सड़क किनारे मौजूद बड़े पेड़ लोगों के लिए महत्वपूर्ण विश्राम स्थल बन गए हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जैसलमेर जैसे शुष्क क्षेत्र में वृक्षों की भूमिका केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह माइक्रो-क्लाइमेट को नियंत्रित करने में भी सहायक है। पेड़ तापमान को 2-4 डिग्री तक कम महसूस कराते हैं। हवा में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। धूल और गर्म हवाओं का प्रभाव घटता है। जैसलमेर में बढ़ती गर्मी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा का मजबूत आधार भी हैं।

दोपहर में ‘नेचुरल रेस्ट जोन’

दोपहर के समय बाजार और मुख्य सड़कें अपेक्षाकृत खाली दिख रही हैं, जबकि पेड़ों की छांव वाले स्थानों पर लोगों की उपस्थिति बढ़ गई है। मजदूर वर्ग, वाहन चालक और पैदल यात्री इन स्थानों को नेचुरल रेस्ट जोन के रूप में उपयोग कर रहे हैं। कई लोग पानी और हल्के पेय के साथ पेड़ों की छांव में कुछ समय रुककर यात्रा जारी कर रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे पेय विक्रेताओं की बिक्री में भी हल्की बढ़ोतरी देखी गई है।

भीषण गर्मी में यह नजर आ रही स्थिति

स्वर्णनगरी में तापमान का स्तर 44 से 46 डिग्री

दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक सर्वाधिक गर्मी

छांव वाले स्थानों पर भीड़ में 30 से 35 प्रतिशत वृद्धि

क्या है भविष्य की जरूरत?

शहरी क्षेत्रों में शेड-ट्री प्लांटेशन

सड़क किनारे ग्रीन कॉरिडोर विकास

सार्वजनिक स्थानों पर छायादार जोन निर्माण

स्कूल और संस्थानों में पौधरोपण अभियान

जानें एक्सपर्ट व्यू…बढ़ेगा हरित आवरण तो घटेगा हीटवेव का प्रभाव

पर्यावरण विश्लेषक डॉ. आरके शर्मा के अनुसार, रेगिस्तानी शहरों में हर एक पेड़ स्थानीय जलवायु को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि शहरी हरित आवरण 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए तो हीटवेव का प्रभाव काफी हद तक कम महसूस होगा।