dholpur, राजाखेड़ा. आर्थिक तौर पर बदहाली का रोना रोने वाली नगर पालिका अपनी ही प्रबंधकीय विफलता के चलते दोहरा नुकसान करने पर आमादा है। लेकिन कुछ प्रभावशाली लोगों को खुश करने के चक्कर में लगातार वित्तीय हानियों को उठाने का प्रयास लंबे समय से जारी है। ऐसे ही एक प्रकरण में पालिका ने अपने स्थायी सफाई कर्मियों को पालिका के वाहनों को चलाने के लिए लगा रखा है। ऐसे कर्मी भी कोई एक दो नहीं बल्कि आधा दर्जन हंै।
देखा जाए तो इनका वेतन प्रति व्यक्ति 35 हजार से ज्यादा है, जबकि पालिका को ठेके पर पावर सप्लाई करने वाले ठेकेदार मात्र 10,500 में ही चालक उपलब्ध करवा रहे हैं और फायर वाहनों के संचालन के लिए ऐसे 12 चालक कार्य भी कर रहे हैं। लेकिन कुछ ताकतवर कार्मिको को उपकृत करने के प्रयासों में प्रतिमाह लाखों रुपए का वित्तीय नुकसान पालिका वर्षों से उठा रही है।
लगभग डेढ़ लाख प्रतिमाह तक नुकसान
पालिका ने अपने ट्रेक्टर ट्रॉलियों व अन्य कचरा उठाने के वाहनों में अपने नियमित सफाई कर्मियों को लगा रखा है। पालिका पहले से ही सफाई कर्मियों की बेहद तंगी से जूझ रही है। ऐसे में इन चालकों के कारण 6 सफाई कर्मी अपने मूल कार्य को छोडकऱ वाहन चालन में लगे हुए हैं। इनका प्रत्येक का वेतन लगभग 35000 रुपए प्रतिमाह है, जो कुल दो लाख रुपए प्रतिमाह हो जाता है। वहीं पालिका ने 14 अन्य वाहन चालक ठेकेदार के माध्यम से भी लगा रखे हैं जो पालिका के फायर वाहन व जेसीबी को संचालित करते हैं। इनको ठेकेदार कुल 10500 रुपए प्रतिमाह पर ही लगाया गया है, जिसमें जीएसटी भी शामिल है। अब लोगों का आरोप है कि जब पालिका को 10500 में चालक ठेकेदार दे रहा है तो उसने 35000 वेतन के कार्मिको को इस कार्य पर क्यों लगाया है। वह भी आधा दर्जन कार्मिकों से अपना मूल कार्य छुड़ाकर पालिका को दोहरा नुकसान दिया जा रहा है।
जमादारों को कार्यालय सुपुर्द
गौरतलब है कि पालिका के पास 8 नियमित जमादार भी हैं, जिनमें से 4 वाल्मीकि वर्ग के और 4 अन्य वर्ग के हैं। पालिका ने कई वर्षों से भारी विरोध के बाद भी सामान्य और ओबीसी वर्ग के जमादारों को सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के मूल कार्य से हटाकर कार्यालय में कैश, स्टोर, भूमि शाखा ए व अन्य महत्वपूर्ण विभाग सुपुर्द कर रखे हैं। जिसकी शिकायत वाल्मीकि वर्ग ने एसडीएम से लेकर स्वायत शासन मंत्री तक हर स्तर पर दर्जनों बार कर ली, लेकिन पालिका उन सभी के कड़े आदेशों को दरकिनार करके जमादारों को कार्यालयों मे जमाए बैठी है, जिससे वाल्मीकि वर्ग में भारी आक्रोश है।
आखिर क्यों अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी
सारे प्रकरण में वित्तीय कुप्रन्धन का मामला सीधा सामने आ रहा है। अगर पालिका के पास ठेकेदार न होता तो सफाई कर्मियों से चालक का काम लेती तो भी जायज था, लेकिन यहां ठेकेदार भी है। ठेके के चालक भी हैं पर फिर भी मात्र कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिमाह लगभग डेढ लाख का वित्तीय नुकसान किया जा रहा है।
मैंने अभी कार्यभार ग्रहण किया है। इसकी जांच कर जल्द कार्रवाई करेंगे।
-विष्णु परमार अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका