टूटा भरोसा, छिन गया सुकून…NEET परीक्षा रद्द होने पर छलका स्टूडेंट्स का दर्द, बोले- किताबें अलमारी में रख दी

सीकर/कोटा: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने पेपर लीक की आशंका के चलते मंगलवार को देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी-2026 रद्द कर दी है। ऐसे में कोटा में नीट स्टूडेंट में निराशा हुई है। स्टूडेंट्स ने बताया कि वे अभी हॉस्टल खाली करने घर ही लौटे थे और परीक्षा रद्द हो गई। अब उन्हें परीक्षा की तैयारी के लिए वापस लौटना होगा। इसके अलावा कई स्टूडेंट्स ने अपनी किताबें और नोट्स या तो बैग में पैक कर दिए या दुकानदारों को वापस कर दिए। ऐसे में अब उन्हें वापस किताबें खरीदनी होगी और नोट्स के लिए जद्दोजहद करनी पड़ेगी।

एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया, परीक्षा ऑफलाइन पेपर पेन मोड पर 3 मई को आयोजित की गई थी। एनटीए ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट की गई। जानकारी में बताया कि परीक्षा में स्वतंत्र एजेंसी अपनी जांच कर रही है, उनके इनपुट्स के आधार पर इस परीक्षा को रद्द किया गया है।

परीक्षा के दोबारा आयोजित करने की जानकारी अभी तय नहीं की गई है। नीट यूजी 2026 परीक्षा में इस बार 22.79 लाख स्टूडेंट्स रजिस्टर्ड थे, जिनमें से 22 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी। कोटा में 92 परीक्षा केंद्रों पर 37,453 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 36981 उपस्थित और 472 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे थे। 98.74 प्रतिशत उपस्थिति रही थी।

क्या बोले स्टूडेंट्स

नीट की परीक्षा रद्द नहीं होनी चाहिए थी। हम कोचिंग करते हैं, मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक हो जाता है। हमारा भविष्य ही बर्बाद हो जाता है। कंपटिशन इतना है कि मेहनत भी बहुत लगती है। सीटें भी बहुत कम होती है। पेपर लीक होना स्टूडेंट के साथ नाइंसाफी है।
-सुधांशु, स्टूडेंट

आत्मविश्वास के साथ दी थी परीक्षा

जब मुझे पता चला कि नीट 2026 परीक्षा रद्द कर दी गई है, तो बहुत निराशा हुई। कोटा में रहकर पूरे साल मेहनत की थी और पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी थी। जेईई एग्जाम की तर्ज पर नीट परीक्षा का सिस्टम निर्धारित किया जाए। उम्मीद है कि नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित होगी। दोबारा से एग्जाम की तैयारी करना वाकई में एक बड़ी चुनौती है। लेकिन तैयारी तो करनी पड़ेगी, क्योंकि इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है।
-दीप्ती पांडे, रांची

पिता डॉक्टर बनते देखना चाहते हैं

मेरे पिता ऑटो चलाते हैं। वे मुझे डॉक्टर बनते हुए देखना चाहते हैं। हम सारा दिन पढ़ाई में लगे रहते थे। पढ़ाई के लिए अपने परिवार के फंक्शन तक छोड़ दिए। प्रोविजनल आंसर की में मुझे सफलता की उम्मीद दिख रही थी। मेरे 500 से ऊपर नंबर आ रहे थे। पूरी उम्मीद कि मुझे बीडीएस कॉलेज मिल थी जाएगा, लेकिन नीट का पेपर ही रद्द हो गया है।
-अली अरमान, स्टूडेंट

मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट 2026 का रद्द होना हम स्टूडेंट्स के लिए मानसिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण है। परीक्षा के लिए हमने लंबे समय तक घर से दूर कोटा में रहकर कड़ी मेहनत की थी। सरकार को मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए। क्योंकि स्टूडेंट्स के साथ-साथ उनके पेरेन्ट्स की भावनाएं भी आहत होती हैं। फिर भी, यदि यह निर्णय निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लिया गया है, तो हम इसका सम्मान करते हैं।
-अंशिका तंवर, इंदौर

परीक्षा रद्द होना बड़ा झटका

नीट का पेपर रद्द होना उन स्टूडेंट्स के लिए बड़ा झटका है, जो इमानदारी से पढ़कर नीट में अच्छे नंबर लाए थे, उनका घाटा हुआ है। हम तीन-चार साल मेहनत करके एग्जाम देते हैं। कुछ लोगों की वजह से पूरी मेहनत खराब हो जाती है। पेपर पहले ही टफ था, पेपर लीक की सूचनाओं के बाद स्टूडेंट्स घबराए हुए थे। अब एक बार फिर से पेपर लीक होने से पूरी मेहनत खराब हो गई।
-दिवांशु अग्रहरे, स्टूडेंट

क्या बोले शिक्षाविद्

जो कुछ हुआ, वह निश्चित रूप से एक अप्रिय घटना है। लाखों छात्रों ने पूरे साल मेहनत की थी और परीक्षा को लेकर उनके मन में सपने और उम्मीदें थीं। ऐसे में परीक्षा स्थगित होना स्वाभाविक रूप से मानसिक दबाव पैदा करता है।

खासतौर पर वे विद्यार्थी, जिनके मॉक टेस्ट और अनुमानित स्कोर 600 से अधिक आ रहे थे, उन्हें यह निर्णय दुखद लग सकता है। भविष्य में पारदर्शिता और सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए नीट जैसी परीक्षाओं को धीरे-धीरे ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
-नितिन विजय, शिक्षाविद्

छात्रों के साथ न्याय होना चाहिए

एनटीए का फैसला केवल परीक्षा दोबारा कराने का विषय नहीं है, बल्कि देश के लाखों मेहनती विद्यार्थियों के विश्वास को पुनः स्थापित करवाने का विषय है। ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों के साथ न्याय होना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन के साथ मैरिट को संरक्षित करने की जरूरत है। स्टूडेंट्स वर्तमान स्थिति में अपना भावनात्मक संतुलन बनाए रखें। मेहनत और अनुशासन और तैयारी कभी व्यर्थ नहीं जाती। इसे चुनौती न मानकर एक अवसर के रूप में ले और अपना सर्वश्रेष्ठ दें।
-इंसाफ अली, शिक्षाविद्

सीकर: नीट रद्द होने से विद्यार्थियों पर बढ़ा मानसिक और आर्थिक दबाव

नीट (यूजी) 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद विद्यार्थियों और अभिभावकों में निराशा और चिंता का माहौल है। 3 मई को आयोजित परीक्षा में देशभर के 22.79 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था। वहीं, सीकर जिले के 102 परीक्षा केंद्रों पर 29,979 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 29,600 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 379 अनुपस्थित रहे।

अब परीक्षा दोबारा होने से विद्यार्थियों को फिर से तैयारी करनी पड़ेगी। एनटीए की ओर से परीक्षा निरस्त करने की घोषणा होते ही सीकर के कोचिंग संस्थानों और हॉस्टल संचालकों के फोन घनघनाने लगे। परीक्षा देकर घर लौट चुके विद्यार्थी और अभिभावक अब फिर से सीकर का रुख कर रहे हैं।

छात्र टेस्ट सीरीज, डाउट क्लासेज, लाइब्रेरी और सेल्फ स्टडी के लिए वापस आने लगे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि तीन साल में दो बार नीट पेपर आउट होने से उनका और अभिभावकों का नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर से भरोसा उठता जा रहा है। हालांकि, विषय विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा हुए अभी सिर्फ नौ दिन हुए हैं, इसलिए विद्यार्थियों की तैयारी का रिदम टूटा नहीं है।

एक छात्र को सीकर या अन्य शहर में रहकर नीट की तैयारी करने में सालभर में करीब ढाई से तीन लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं। इसमें हॉस्टल, भोजन, किताबें, यूनिफॉर्म और परिवहन शामिल हैं। अब परीक्षा दोबारा होने से अगले डेढ़ महीने तक तैयारी जारी रखने में प्रत्येक विद्यार्थी पर करीब 30 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है।

कुछ इस तरह से जाहिर की अपनी नाराजगी

हनुमानगढ़ के नोहर की छात्रा आरजू चौधरी ने बताया कि नीट परीक्षा में उसके लगभग 700 अंक बन रहे थे। परीक्षा रद्द होने की सूचना मिलते ही वह फिर से लाइब्रेरी में पढ़ाई करने पहुंच गई। उसने कहा कि सकारात्मक सोच के साथ अब पहले से बेहतर स्कोर करने की कोशिश करेगी।

एनटीए से भरोसा उठा

सिरसा की छात्रा कृष्णा ने बताया कि उसके करीब 635 अंक बन रहे थे। उसने कहा कि लगातार पेपर आउट होने की घटनाओं से विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है। हालांकि वह दोबारा पूरी मेहनत के साथ तैयारी करेगी।

नुकसान ही नुकसान

जोधपुर के छात्र मनोज ने बताया कि उसके लगभग 650 अंक बन रहे थे और उसे अच्छे मेडिकल कॉलेज की उम्मीद थी। अब दोबारा तैयारी के लिए सीकर लौटना पड़ेगा। उसने कहा कि पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस घटनार म से आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का नुकसान हुआ है।

कटऑफ बढ़ती तो नुकसान होता

चूरू के महलाना गांव की छात्रा दिव्या राठौड़ ने बताया कि उसके लगभग 520 अंक बन रहे थे। उनका कहना है कि यदि पेपर आउट होने के बावजूद परीक्षा मान्य रहती तो कटऑफ बहुत अधिक चली जाती और मेहनत करने वाले हजारों छात्रों को नुकसान होता। उसने इसे दोबारा खुद को साबित करने का अवसर बताया।

अच्छे मेडिकल कॉलेज की उम्मीद

दांतारामगढ़ निवासी छात्र नरेंद्र टोडावत ने बताया कि उसके करीब 600 अंक बन रहे थे और उसे अच्छे मेडिकल कॉलेज की उम्मीद थी। परीक्षा रद्द होने की खबर से वह परेशान हो गया, हालांकि अब वह फिर से हॉस्टल में लौटकर तैयारी करेगा।

मनोबल टूटता है

पाली की छात्रा खुशीराज आशिया ने कहा कि सालभर मेहनत के बाद पेपर रद्द होना निराशाजनक है। उसने कहा कि एनटीए को परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि रोज 15-16 घंटे पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का मनोबल न टूटे।