जयपुर। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG पेपर लीक मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब तक की जांच में पता चला है कि लीक हुआ पेपर सबसे पहले महाराष्ट्र के पुणे और नासिक तक पहुंचा था। वहां से यह हरियाणा के गुड़गांव पहुंचा और फिर राजस्थान की राजधानी जयपुर में अभ्यर्थियों तक सप्लाई किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पूरी जांच अपने हाथ में ले ली है।
दिल्ली में सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया है। मंगलवार शाम करीब छह बजे सीबीआई की टीम जयपुर स्थित एसओजी मुख्यालय पहुंची, जहां राजस्थान एसओजी ने अब तक जुटाए गए दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और कुछ संदिग्धों को एजेंसी के हाथ सौंपा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई राज्यों में एक साथ छापेमारी हो सकती है।
‘प्राइवेट माफिया’ नाम के वॉट्सऐप ग्रुप का खुलासा
जांच में सामने आया है कि पेपर लीक का नेटवर्क सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए संचालित हो रहा था। ‘प्राइवेट माफिया’ नाम के एक वॉट्सऐप ग्रुप का खुलासा हुआ है, जिसमें करीब 400 सदस्य जुड़े हुए थे। ग्रुप में कथित तौर पर लीक पेपर और उससे जुड़े प्रश्न साझा किए जाते थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस ग्रुप में मौजूद ‘गेस पेपर’ के कई सवाल असली परीक्षा में हूबहू मिले हैं। दावा किया जा रहा है कि जीव विज्ञान के लगभग सभी सवाल और रसायन विज्ञान के अधिकांश प्रश्न मूल प्रश्नपत्र से मेल खाते थे।
पेपर लीक का कौन है मास्टरमाइंड?
राजस्थान एसओजी ने इस पूरे मामले में मनीष यादव को मुख्य मास्टरमाइंड माना है। उसे जयपुर से हिरासत में लिया गया है। उसके साथ राकेश मंडावरिया नाम के व्यक्ति को भी पकड़ा गया है, जिस पर पेपर को अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का आरोप है। हालांकि अभी तक दोनों के खिलाफ औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, लेकिन जांच एजेंसियों का कहना है कि नेटवर्क की कड़ियां काफी हद तक जुड़ चुकी हैं।
राजस्थान में ‘गेस पेपर’ के नाम से वायरल
इससे पहले भी राजस्थान में ‘गेस पेपर’ के नाम पर करीब 150 पेज का दस्तावेज वायरल हुआ था। इसमें 410 प्रश्न थे, जिनमें बड़ी संख्या में सवाल असली परीक्षा से मेल खाते पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ कोचिंग नेटवर्क और फोटो कॉपी सेंटरों के जरिए सामग्री छात्रों तक पहुंचाई गई। आशंका है कि चुनिंदा छात्रों से लाखों रुपए लेकर यह पेपर उपलब्ध कराया गया।
22 लाख छात्रों की बढ़ी चिंता
पेपर लीक मामले ने देशभर के 22 लाख से ज्यादा छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। विपक्ष भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रहा है। अब सीबीआई की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं कि आखिर इस राष्ट्रीय स्तर के पेपर लीक नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल हैं और कितने बड़े स्तर पर यह खेल खेला गया।