Dholpur: खदानों में टांकियों की खनखनाहट खामोश, श्रमिकों का पलायन

Dholpur, सरमथुरा क्षेत्र में पत्थर कारोबार बंद होने के बाद खनन श्रमिक लामबंद हो गए हैं। खनन श्रमिकों ने वन अधिकारियों पर खनन श्रमिकों के साथ बदसलूकी करने सहित उत्पीडऩ करने का आरोप लगाया है। वन अधिकारियों का खनन श्रमिकों में खौफ ऐसा है कि अवैध तो छोड़ो वैध खनन भी करने से कतरा रहे हैं। हकीकत यह है कि तीन माह से पत्थर कारोबार बंद होने के कारण खदानों में टांकियों की खनखनाहट थम गई है, वहीं गैंगसा मशीनों पर ताले लटक गए हैं। रोजगार के अभाव में हजारों श्रमिक पलायन कर चुके हैं।

आलम यह है कि तीन माह से उद्योगों पर पत्थर ब्लॉक की एक भी टुकड़ी नहीं पहुंची है। वन अधिकारियों के वैध ई-रवन्ना पर वाहनों को जब्त करने के कारण पत्थर व्यवसायी भयभीत हैं। स्थिति यह है कि पत्थर कारोबार बंद होने के कारण सरकार की रेवन्यू भी आधी रह गई है। सोमवार को खनन श्रमिक व गैंगसा स्टोन एसोसिएशन की लगातार दूसरी बार बैठक खरेर नदी स्थित हनुमान मंदिर पर आयोजित हुई। बैठक में पत्थर कारोबार को शुरू कराने पर मंथन हुआ। बैठक में खनन श्रमिकों ने एक स्वर में कृषि मंत्री डॉक्टर किरोडी लाल मीणा से मुलाकात कर वास्तविक स्थिति से अवगत कराने का निर्णय किया गया।

पत्थर कारोबार पर संकट देख बसेड़ी के पूर्व विधायक व विधायक प्रत्याशी सुखराम कोली ने वन अधिकारियों पर वनों में पेड़ कटवाने, सडक़ों पर वाहनों को पकडऩे सहित जंगल में आग लगाने के आरोप लगाए है। पूर्व विधायक ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों को षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाया है। वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व वनमंत्री संजय शर्मा से उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित करने की मांग की है।

वैध खदानों में भी खनन को तैयार नहीं श्रमिक

जिले में खान एवं भू विज्ञान विभाग ने पत्थर कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बसेड़ी, बाड़ी, सरमथुरा इलाके में नादनपुर, तिलऊआ, नकसोंदा, कछपुरा, चिलाचौंद, ददरौनी, भिरामद, मड़ासिल, बड़ागांव, तेजापुरा सहित कई क्षेत्रों में खनन पट्टे स्वीकृत किए हुए हैं। विडंबना यह है कि वनविभाग के भय के कारण खनन श्रमिक वैध खदानों में भी काम करने से कन्नी काट रहे हैं। श्रमिकों को पकड़े जाने पर जेल जाने का डर सता रहा है।

पड़ोसी जिले करौली व बंशी पहाड़पुर पर निर्भर हुआ पत्थर कारोबार

वनविभाग ने वाहन व मशीनरी को पकडऩे के भय से पत्थर कारोबारियों ने संसाधनों को भूमिगत कर दिया है। वहीं जिले में कच्चे खनिज की आमदनी बंद होने के कारण पड़ोसी जिले करौली व बंशी पहाड़पुर पर पत्थर कारोबार निर्भर हो गया है, हालांकि भाड़ा व खर्चा अधिक होने के कारण गैंगसा उद्यमियों को कारोबार में कोई फायदा नहीं हो रहा है, बल्कि पड़ोसी जिलों को रेवन्यू का फायदा जरूर होने लगा है।