dholpur: मिलावटी दूध तैयार करने वाले 9 आरोपितों को 10-10 साल की सजा

धौलपुर. मिलावटी दूध तैयार करने वालों के खिलाफ जिला एवं सेशन न्यायाधीश संजीव मांगो ने कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मिलावटीखोरी के करीब दस साल पुराने प्रकरण में 9 आरोपितों को 10-10 साल की सजा और कुल 45 लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। प्रत्येक आरोपित पर 5-5 लाख रुपए का जुर्माना किया है।

लोक अभियोजक भगवान सिंह नारोलिया ने बताया कि उक्त प्रकरण 28 फरवरी 2015 को धौलपुर के सदर पुलिस थाने में तत्कालीन थाना प्रभारी विजय सिंह की ओर से दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि अजीत ढाबे के पीछे एक मकान में केमिकल फॉर्मोलिन और रिफाइंड तेल का उपयोग कर नकली दूध तैयार किया जा रहा था। पुलिस ने दबिश देकर आरोपितों को सामान के साथ गिरफ्तार किया था।

इस प्रकरण में कुल 14 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मृत्यु हो गई, जबकि साक्ष्यों के अभाव में चार अन्य आरोपितों को न्यायालय ने बरी कर दिया।

कोर्ट ने मामले मेंं आरोपित संजय चौहान निवासी बजरिया धाना निहालगंल धौलपुर, वृन्दावन निवासी पोखरा थाना निहालगंज, बैजनाथ निवासी भोलापुरा थाना सदर, शिशुपाल निवासी सन्तर रोड थाना निहालगंज, प्रमोद निवासी सुल्तानपुरा थाना कंचनपुर, जसवंत निवासी सिंहौनिया मुरैना एमपी, जितेन्द्र निवासी कासिमपुर थाना सदर, धौलपुर, घूरे सिंह ठाकुर निवासी हरजूपुरा थाना बसेड़ी और रामवीर निवासी कासिमपुर थाना सदर धौलपुर को भादंस. की धारा 328 और 120बी के तहत 10-10 साल के कठोर कारावास और प्रत्येक आरोपित पर 5-5 लाख रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है।

कोर्ट ने उक्त कृत्य को जहरीला पदार्थ देने की श्रेणी में रखा

अदालत ने निर्णय में टिप्पणी करते हुए कहा कि दूध में फॉर्मोलिन जैसे रसायनों का उपयोग अत्यंत घातक है। यह एक धीमा जहर है, जिसके सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि आरोपितों के दूध में केमिकल व लिक्विड डिटर्जेंट मिलाकर न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढिय़ों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। न्यायालय ने इस कृत्य को केवल खाद्य सुरक्षा कानून का उल्लंघन नहीं माना, बल्कि इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 328 के तहत जहरीला पदार्थ देने की श्रेणी में भी रखा।

लोक अभियोजक ने कहा कि इस तरह के सख्त फैसलों से मिलावटखोरों में भय पैदा होगा और आमजन को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।