Jaipur: ‘मां कब आएगी…?’, रोते-रोते पूछ रहा बेटा, तेज रफ्तार SUV की टक्कर के बाद ICU में जिंदगी की जंग लड़ रही नेहा

Speeding SUV Hit Woman In Jaipur: तेज रफ्तार काली SUV (Sports Utility Vehicle) की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हुई नेहा ICU वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। हादसे के बाद से परिवार सदमे में है, जबकि उनका आठ साल का बेटा रातभर सिर्फ एक ही सवाल पूछता रहा—‘मां कब आएगी?’ अस्पताल के वेटिंग एरिया में बैठे पति अंकित सक्सेना ने आरोप लगाया कि हादसे के जिम्मेदार लोग आदतन अपराधी हैं और हर बार बच निकलते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार परिवार चुप नहीं बैठेगा और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेगा।

बेटे को संभाल रहे घरवाले

हादसे के चश्मदीद और नेहा के देवर अर्पित ने बताया कि नेहा घर से महज 700 मीटर दूर एक छोटे काम के लिए निकली थीं, तभी तेज रफ्तार काली SUV ने उन्हें टक्कर मार दी। अर्पित ने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से पूरा हादसा देखा और वह मंजर जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे। वहीं घर में सबसे ज्यादा असर नेहा के बेटे पर पड़ा है, जिसे अस्थमा है। परिजन उसे झूठे दिलासे देकर संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मां की हालत को लेकर परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

लापरवाही का आलम: 1 किमी में 3 कट

मानसरोवर के विजय पथ पर मंगलवार को तेज रफ्तार एसयूवी की टक्कर से स्कूटी सवार महिला घायल होना सिर्फ एक हादसा नहीं, जेडीए की बड़ी लापरवाही भी है। जेडीए ने इस मार्ग पर लोहे की ऊंची रेलिंग लगाकर जगह-जगह कट छोड़ दिए हैं। पत्रिका रिपोर्टर ने बुधवार को मौके पर देखा तो एक किलोमीटर में ही तीन जगह ऐसे कट मिले, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। विजय पथ दुर्गापुरा और मुहाना को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है, जहां दिनभर बड़ी संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। जेडीए ने इस मार्ग पर एक फीट ऊंचा डिवाइडर बनाकर उस पर 5 फीट ऊंची रेलिंग लगा दी है।

इस रेलिंग के बीच एक इंच की भी जगह नहीं है, जिससे सड़क के दूसरी ओर दौड़ रहा ट्रैफिक दिखाई नहीं देता। कट से निकलना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। यहां तेज रफ्तार ही नहीं, सामान्य गति से चलते वाहन भी टक्कर का कारण बन सकते हैं।

घनी आबादी और वाहनों की रफ्तार

जेडीए ने तीन जगह डिवाइडर में कट तो छोड़ दिए, लेकिन घनी आबादी वाले क्षेत्र में भी कट से पहले न स्पीड ब्रेकर बनाए और न ही गति सीमा के संकेतक लगाए। ऐसे में वाहन चालक तेज रफ्तार से दौड़ रहे हैं।

कागजों में 80 फीट चौड़ी, मौके पर 30 फीट

विजय पथ की हकीकत कागजों और धरातल पर बिल्कुल अलग है। जेडीए के रिकॉर्ड में यह सड़क 80 फीट चौड़ी दर्ज है, लेकिन मौके पर अतिक्रमण के चलते सड़क 30 से 40 फीट भी नहीं बची है। इस संकरी सड़क को चौड़ा किए बिना ही बीच में डिवाइडर और 5 फीट ऊंची रेलिंग लगा दी गई है।

सोशल मीडिया पर विरोध

मंगलवार को हुए हादसे के बाद स्थानीय लोग सोशल मीडिया पर भी जेडीए की रेलिंग लगाने का विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इससे एक साइड से दूसरी साइड का यातायात दिखाई नहीं देता। कुछ लोग रॉन्ग साइड से भी आते हैं। जेडीए अनहोनी का इंतजार कर रहा है।

फरवरी की शिकायत को नहीं लिया गंभीरता से

स्थानीय निवासी संजीव माथुर ने 4 फरवरी को ‘राजस्थान संपर्क’ पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें रेलिंग हटाकर छोटी रेलिंग लगाने की मांग की गई थी। इस पर 19 फरवरी को जेडीए जोन-5 के अधिशासी अभियंता ने जवाब दिया कि प्रकरण में निरीक्षण प्रक्रियाधीन है तथा नियमों के अनुसार कार्यवाही प्रस्तावित है और मामले का निस्तारण कर दिया। लेकिन मौके पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

काम भी अधूरा छोड़ा

जेडीए ने विजय पथ पर डिवाइडर और रेलिंग लगाने का काम नवंबर में शुरू किया था। इस पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन संवेदक ने अभी आधा काम भी पूरा नहीं किया और उसे बंद कर दिया। इस काम में स्वर्ण पथ पर भी रेलिंग लगाने का प्रावधान था।

मुख्य मार्गों पर कट बंद, यहां खुले

जेडीए शहर के मुख्य मार्गों पर सुगम यातायात के लिए कट और यू-टर्न बंद कर रहा है, जबकि घनी आबादी वाले विजय पथ पर कट छोड़ दिए गए हैं।

ये हैं जिम्मेदार अधिकारी

मदनलाल बैरवा — तत्कालीन एक्सईएन (निर्माण कार्य के दौरान)
सोएब खान — वर्तमान एक्सईएन
अजय गर्ग — निदेशक अभियांत्रिकी