प्रदेश के शिक्षा विभाग में शिविरा पंचांग 2026-27 में किए गए बदलावों ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए उन्हें शिक्षक विरोधी मानसिकता वाला करार दिया है। राजस्थान शिक्षक संघ ने ग्रीष्मावकाश में 10 दिन की कटौती और संस्था प्रधान के अधिकारों में कमी किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ के मुख्य संरक्षक एवं प्रशासनिक अध्यक्ष सियाराम शर्मा ने शिक्षामंत्री मदन दिलावर को एक पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने विभाग के हालिया आदेशों की कड़ी आलोचना की है।
मंत्री पद की शपथ के बाद से ही शिक्षक विरोधी आदेश
संघ का आरोप है कि शिक्षामंत्री का दायित्व संभालने के बाद से ही मदन दिलावर की मानसिकता शिक्षकों और शिक्षार्थियों के खिलाफ रही है। शर्मा ने पत्र में लिखा है, प्रारंभ से ही मंत्री द्वारा शिक्षक विरोधी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से वक्तव्य दिए जाते रहे हैं और शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षक विरोधी आदेश जारी किए गए हैं।
विवाद की मुख्य जड़: छुट्टियों में कटौती
संघ ने शिक्षा विभाग के नए पंचांग पर ऐतराज जताया है। इसमें शिक्षकों के ग्रीष्मावकाश में 10 दिन की कटौती की गई है। संस्था प्रधान के अधिकार क्षेत्र से 1 दिन के अवकाश में भी कटौती की गई है। संघ का कहना है कि इन छुट्टियों के लिए पूर्व में कई बार धरने और आंदोलन किए गए थे। इसके बाद ही विभाग ने पंचांग जारी किया था। इस कटौती को संघ ने मंत्री की शिक्षक व शिक्षार्थी विरोधी मानसिकता का प्रमाण बताया है।
सलाहकारों पर भी साधा निशाना
शिक्षक संघ ने शिक्षामंत्री के सलाहकारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सतीश गुप्ता पर निशाना साधते हुए पत्र में कहा गया है कि, गुप्ता जितनी रुचि पदस्थापन एवं स्थानान्तरणों में लेते हैं, यदि उतनी रुचि शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं को सुधारने में लेते तो, शायद इस प्रकार अवकाशों में कटौतियां नहीं की जातीं।ग्रीष्मावकाश में 10 दिन की कटौती और संस्था प्रधान के अधिकारों में कमी पर कड़ा एतराज जताया है। इसे लेकर शिक्षको ने मुख्यमंत्री से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।