राजस्थान में ‘लिक्विड गोल्ड’ की हाईटेक चोरी में SOG का बड़ा खुलासा, गैंग करती 1-1 करोड़ का ‘इन्वेस्टमेंट’

Liquid Gold Oil Smuggling: राजस्थान में तेल की पाइपलाइनों में सेंध लगाकर करोड़ों की चोरी करने वाला नेटवर्क किसी ‘संगठित उद्योग’ की तरह काम कर रहा है। एसओजी की पड़ताल में सामने आया है कि यह गैंग चोरी शुरू करने से पहले करीब 1-1 करोड़ रुपए का भारी-भरकम निवेश करती है। इस राशि से सुरंग खोदने, तकनीकी विशेषज्ञ बुलाने और संसाधनों का पूरा सेटअप तैयार किया जाता है।

पड़ताल: ऐसे बिछाते चोरी के लिए जाल

गैंग का काम करने का तरीका बेहद पेशेवर है। पहले पाइपलाइन के रूट की रैकी की जाती है और फिर आसपास के सुनसान इलाके में खेत या मकान किराए पर लिया जाता है। इसके बाद असली काम शुरू होता है।

सुरंग का निर्माण: जमीन से 25 से 40 फीट नीचे करीब 400 फीट लंबी सुरंग खोदी जाती है।

ढांचागत मजबूती: मिट्टी को ढहने से बचाने के लिए सुरंग में लकड़ी के फंटों का इस्तेमाल होता है।

हाईटेक ड्रिलिंग: पाइपलाइन में छेद करने के लिए अत्याधुनिक मशीनों और विशेषज्ञों की मदद ली जाती है।

सप्लाई चैन: चोरी का तेल सीधे टैंकरों में भरकर उन फैक्टरियों तक पहुंचाया जाता है जो इसे सस्ते दामों पर खरीदती हैं।

जेल से निकलते ही फिर सक्रिय हो जाते हैं गिरोह

जांच में यह भी सामने आया है कि देशभर में मुख्य रूप से तीन-चार बड़े गिरोह ही सक्रिय हैं। ये गिरोह इतने शातिर हैं कि जेल से छूटते ही नई जगह रैकी कर दोबारा निवेश करते हैं और वारदात शुरू कर देते हैं। राजस्थान में पिछले पांच वर्षों में शाहजहांपुर, बगरू, कोटपूतली, ब्यावर, पाली और दौसा जैसे इलाकों में ऐसी चोरी के 8 से 10 बड़े मामले सामने आ चुके हैं।

गैंग का अलग-अलग स्तर पर काम

सरगना: जो पूरी वारदात के लिए निवेश और फंड मुहैया कराता है।

टेक्निकल टीम: पाइपलाइन में सुरक्षित तरीके से ड्रिल और टैपिंग करने वाले विशेषज्ञ।

लोकल सपोर्ट: रहने के लिए मकान, खेत और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले स्थानीय लोग।

खरीदार नेटवर्क: चोरी का डीजल और क्रूड ऑयल खरीदने वाले फैक्टरी मालिक या ट्रेडर्स।

एडीजी एसओजी ये बोले…

भूमिगत पाइपलाइन से तेल चोरी करने वाली मुख्यत: देशभर में तीन-चार गैंग सक्रिय हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि गैंग नई जगह तेल चोरी के लिए सेटअप तैयार करने के लिए करीब एक करोड़ रुपए खर्च करती है। फिलहाल कई सदस्य जेल में हैं और कुछ की तलाश की जा रही है।

-विशाल बंसल, एडीजी, एसओजी राजस्थान