भीलवाड़ा। राजस्थान में कई ऐसे गांव है जो हमेशा से अपनी अनोखी पहचान के लिए जाने जाते रहे हैं। ऐसे ही एक गांव का नाम आता है- कारोई गांव। यह गांव भीलवाड़ा जिले में बसा हुआ है। इस गांव को ज्यादातर लोग ज्योतिष नगरी के नाम से जानते हैं। यहां घर-घर में ज्योतिष की चर्चा होती है। देश-विदेश में यह गांव अपनी भविष्य बताने की विद्या के लिए पहचाना जाता है। यह गांव भीलवाड़ा-राजसमंद मार्ग पर स्थित है।
यहां देशभर से बड़े से बड़े लोग अपने जीवन, राजनीति, कारोबार और परिवार से जुड़े सवाल लेकर पहुंचते हैं। आम लोगों से लेकर बड़े नेता, उद्योगपति और कलाकार तक इस गांव का रुख कर चुके हैं। कारोई में कई परिवार पीढ़ियों से ज्योतिष विद्या से जुड़े हुए हैं। खासतौर पर भृगु संहिता और अंक गणना के आधार पर भविष्य बताने की परंपरा यहां काफी पुरानी मानी जाती है।
भृगु संहिता से देखा जाता है भविष्य
गांव के लोगों के अनुसार, पहले यहां सामान्य पंचांग देखकर भी भविष्य बताया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे यहां भृगु संहिता, ज्योतिष और विशेष तरीके की गणनाओं का उपयोग बढ़ा। इस गांव के घर-घर में ज्योतिष विद्या का उपयोग भविष्य जानने के लिए किया जाता है। यही वजह है कि इस गांव को ज्योतिषियों का गांव या ज्योतिष गांव कहा जाने लगा। भीलवाड़ा जिले का कारोई सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि राजस्थान की उस परंपरा का हिस्सा है जहां विश्वास, गणना और परंपरा साथ चलते हैं। यही कारण है कि यह गांव आज भी लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।
प्रतिभा पाटिल के राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी
कहा जाता है कि कारोई गांव का नाम सबसे ज्यादा तब चर्चा में आया जब पंडित नाथूलाल व्यास जो भृगु संहिता के अच्छे जानकार माने जाते रहे है उन्होनें प्रतिभा पाटिल के राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी की और वो सच हो गई। बताया जाता है कि राजस्थान की राज्यपाल रहते हुए प्रतिभा पाटिल ने उनसे परामर्श लिया था। इसी घटना के बाद कारोई गांव राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। इसके अलावा कई बड़े नामों को लेकर भी कारोई चर्चा में आया जैसे- राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी, वसुंधरा राजे, अमर सिंह। चुनावी मौसम में इस गांव में नेताओं की आवाजाही खूब बढ़ जाती है।
लोग कारोई में सिर्फ भविष्य जानने नहीं, बल्कि ग्रह दोष, शुभ समय और जीवन के उचित फैसलों के लिए सलाह लेने भी आते हैं। फोरलेन हाइवे बनने के बाद यह गांव मेन रोड़ से थोड़ा अलग जरूर हो गया, लेकिन इससे गांव की पहचान कम नहीं हुई। आज भी युवा पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। कई सारे शोध के छात्र भी यहां ज्योतिष विद्या को समझने पहुंचते हैं।