गर्मी शुरू होते ही अभिभावक अब फन पार्कों की ओर रुख करने लगे हैं। फन पार्क भी नए-नए ऑफर देकर लोगों को रिझा रहे हैं, लेकिन इस बार प्रशासन भी मुस्तैद है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि स्वीमिंग पूल संचालन के नियम तोड़े गए तो एक्शन लिया जाएगा। नगर निगम व यूआइटी अपने-अपने एरिया की मॉनिटरिंग करेंगे।
जिले में फन पार्काें की संख्या दो दर्जन से अधिक है। शहर के आसपास सर्वाधिक फन पार्क जयपुर मार्ग स्थित कटीघाटी, दिल्ली रोड पर हैं। यहां प्रति घंटे नहाने का शुल्क 400 से लेकर 600 रुपए तक है। कई जगहों पर शुल्क ज्यादा भी है। इसके अलावा कई होटल, रिजॉर्ट ऐसे हैं, जिनमें स्वीमिंग पूल बने हैं, जहां नियमों की अनदेखी होती है। पानी की बर्बादी भी होती है। हादसों से लेकर अन्य चीजों को देखते हुए ही निगरानी जरूरी है। यही वजह है कि अब नियमों की जांच करने की तैयारियां हैं।
ऐसे हुआ था हादसा
कटीघाटी स्थित एक वाटर पार्क में नमन नाम का 9 वर्षीय बालक परिवार के साथ नहाने गया था, जिसकी डूबने से मौत हो गई थी। यह पूरी घटना पार्क में लगे सीसीटीवी में कैद हो गई थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस मामले में केस भी दर्ज किया गया था।
नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी इनकी
प्रशासन, नगर निगम, यूआइटी, खेल विभाग
ये है प्रक्रिया
-स्वीमिंग पूल शुरू करने के लिए नगर निगम व खेल विभाग से लाइसेंस अनिवार्य है।
-नगर निगम या नगरपालिका, अग्निशमन विभाग, पुलिस विभाग से एनओसी लेनी होंगी।
-स्वामित्व का प्रमाण, साइट प्लान, पूल की तस्वीरें, पानी की जांच रिपोर्ट और जीएसटी पंजीकरण आवश्यक है।
-पूल में क्लोरीन का स्तर 2.0 पीपीएम और पीएच स्तर 7 से 7.40 के बीच बनाए रखना अनिवार्य है।
-पूल के चारों ओर कम से कम 4 फीट ऊंची बाड़ होनी चाहिए] गहराई के संकेत, डाइविंग निषेध के बोर्ड लगाने जरूरी है। आपातकालीन नंबर स्पष्ट रूप से लिखे होने चाहिए।
-लाइफ गार्ड (प्रशिक्षित गोताखोर) और प्राथमिक चिकित्सा किट की उपलब्धता अनिवार्य है।
-स्वीमिंग पूल रात 12 से सुबह 5 बजे के बीच नहीं खोले जा सकते, जब तक कि विशेष अनुमति न हो।