Jaipur Traffic Reform: जयपुर शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और अव्यवस्थित ई-रिक्शा संचालन पर लगाम लगाने के लिए अब बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस, यातायात और परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा के लिए डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
पूरे शहर को सात जोन में बांटकर ई-रिक्शा का संचालन किया जाएगा। नई व्यवस्था की प्रक्रिया 3 मई से शुरू होगी। 3 मई से 15 जून तक ई-रिक्शा चालकों से क्यूआर कोड के लिए आवेदन लिए जाएंगे। 16 जून से 30 जून तक पात्र चालकों को क्यूआर कोड जारी होंगे और 1 जुलाई से शहर में जोनवार संचालन लागू कर दिया जाएगा।
5 साल से कवायद, अब उम्मीद
गौरतलब है कि पिछले पांच साल से ई-रिक्शा को जोनवार संचालित करने की कवायद चल रही थी, लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। इस बार राजधानी में व्यवस्थित संचालन का दावा किया जा रहा है।
25 हजार ई-रिक्शा बाहर होंगे
क्यूआर कोड पाने के लिए चालकों को आरसी, बीमा, फिटनेस प्रमाण पत्र, स्थायी लाइसेंस और आधार कार्ड जमा करना होगा। यही सबसे बड़ी चुनौती है। फिलहाल जयपुर में करीब 3,000 ई-रिक्शा चालकों के पास केवल लर्निंग लाइसेंस है, जबकि मात्र 700 चालकों के पास स्थायी लाइसेंस है।
ऐसे में हजारों चालकों को 3 मई से पहले स्थायी लाइसेंस बनवाने की दौड़ लगानी होगी, वरना आवेदन नहीं कर पाएंगे। बिना लाइसेंस, फिटनेस, बीमा और आधार कार्ड पेश न करने वाले करीब 20 से 25 हजार ई-रिक्शा का सिस्टम से बाहर होना तय है।
तीन चरणों में लागू होगी व्यवस्था
3 मई से 15 जून : क्यूआर कोड के लिए ऑनलाइन आवेदन
16 जून से 30 जून : पात्र चालकों को क्यूआर कोड जारी
1 जुलाई से आगे : सात जोन में विभाजित होकर ई-रिक्शा का संचालन
हर जोन में संचालन समिति
व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए हर जोन में संचालन समिति गठित होगी। इसमें ई-रिक्शा चालक प्रतिनिधि, आरटीओ अधिकारी और यातायात पुलिस के अफसर शामिल होंगे। समिति अपने जोन में अनुशासन बनाए रखेगी। परकोटे की तर्ज पर पूरे शहर को 7 जोन में बांटा जाएगा। आवेदन के समय चालक अपनी पसंदीदा जोन की च्वॉइस देंगे और उसी जोन में संचालन की अनुमति मिलेगी।
संभावित फायदे
जोनवार संचालन से ई-रिक्शा की अव्यवस्था पर नियंत्रण मिलेगा।
बाहरी राज्यों के वे चालक, जिनके पास जयपुर का आधार कार्ड नहीं है, सिस्टम से बाहर हो जाएंगे।
ई-रिक्शा मुख्य सड़कों के बजाय छोटी और अंदरूनी सड़कों पर संचालित होंगे, जिससे ट्रैफिक जाम में कमी आएगी।
डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता
क्यूआर कोड आधारित इस सिस्टम से ई-रिक्शा की डिजिटल पहचान होगी। किसी भी वाहन की जानकारी, रूट और चालक का विवरण आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा। यातायात नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी। यदि कोई ई-रिक्शा दूसरे जोन में गया तो क्यूआर कोड स्कैन कर उसकी पहचान हो जाएगी।
आरटीओ ये बोले…
मुख्यमंत्री के निर्देश पर शहर में ई-रिक्शा का डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है। आवेदन से लेकर नई प्रणाली से संचालन तक की रूपरेखा तय कर ली गई है।
राजेन्द्र सिंह शेखावत, आरटीओ-प्रथम, जयपुर