Real Life Inspirational Story: नौकरी कर रहे युवाओं के लिए शशिभूषण का उदाहरण बड़ी प्रेरणा देता है। एक ऐसा शख्स जिसे पढ़ाई पूरी करने के बाद कई नौकरी मिली, कहीं मन नहीं लगा तो कहीं अथक मेहनत की लेकिन ढाई दशक नौकरी करने के बाद खुद का व्यापार शुरू किया। कंसल्टेंसी से शुरू हुआ सफर उत्पादन तक पहुंचा।
नौकरी, कंसल्टेंसी, जॉब वर्क और उत्पादन सभी जगह मेहनत की, जिसकी वजह से कभी मुडक़र नहीं देखना पड़ा। शशिभूषण का जन्म एक जून 1956 को कुचेसर बुलंदशहर में हुआ। पिता परमानंद शर्मा इंटर कॉलेज में व्याख्याता थे। शशिभूषण ने रुडक़ी विश्वविद्यालय से 1978 में इलेक्ट्रिकल में बीई किया। बीई करने के बाद एक साल एमई की पढ़ाई की। बिजली बोर्ड में चयन हुआ लेकिन नौकरी छोड़ दी।
सितंबर 1980 में राजस्थान वित्त निगम में सहायक प्रबंधक के पद पर जयपुर शाखा में नियुक्ति मिली। वित्त निगम में 2004 तक सेवाएं दीं। अलवर में नियुक्ति के दौरान प्रदेश सरकार ने वीआरएस स्कीम लागू की थी, कि अगर कोई कर्मचारी अपना काम करना चाहे तो वह पांच साल का अवकाश ले सकता था, पांच साल के बाद दोबारा नियुक्ति ले सकता था। अथवा वीआरएस ले सकता था। उस समय मेरी उम्र 48 साल थी। हम नौकरी में भी मेहनत करते थे, इसलिए खुद का व्यवसाय करने की सोची और एक तरफ का मन बनाया और वीआरएस लिया।
वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भिवाड़ी में प्रोजेक्ट कंसल्टेंसी का काम शुरू किया। 2004 में मैंने सर्टिफाइड एनर्जी मैनेजर की परीक्षा पास करने के बाद एक साल बाद सर्टिफाइड एनर्जी ऑडिटर की परीक्षा पास की। इसके बाद मैंने इलेक्ट्रिकल एनर्जी के संबंध में भी कंसल्टेंसी शुरू कर दी। वित्तीय और ऊर्जा सलाहकार के तौर पर मेरा काम अच्छा चला। 2006 में फेनेस्टा बिल्डिंग सिस्टम जो कि यूपीवीसी खिडक़ी दरवाजे निर्माण करती है, उसके खिडक़ी दरवाजे साइट पर लगाने का काम हमें मिल गया। पहला काम कार कंपनी मानेसर में मिला। ये काम भी अच्छा चला।
2010 में यूपीवीसी के खिडक़ी दरवाजे निर्माण की फैक्टरी रामपुर मुंडाना में लगाई। धीरे-धीरे प्रगति होती गई। काम बढ़ता गया। फैक्टरी का भी विस्तार हो गया। बेटा अभिनव भूषण भी मेरे साथ काम करने लगा। अब करोड़ों का टर्नओवर हो गया है। 30 कर्मचारी हमारे यहां नियमित काम करते हैं, जिन्हें प्रति महीने करीब सात लाख रुपए वेतन दिया जाता है।
युवाओं को सीख
अगर जीवन में मेहनत करना सीख लिया है तो सफलता जरूर मिलेगी। मेरे साथ काम करने वाले कई कर्मचारियों ने भी अपनी फैक्टरी खड़ी कर ली है। मैंने उन्हें अच्छे से काम सिखाया और आज उनकी प्रगति देखकर काफी खुशी होती है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, यह मेहनत, लगन, निरंतरता और ईमानदारी में छिपी रहती है।