Shantinath Digambar Jain Dispensary: आज जब बीमारी के इलाज के लिए लोगों को हजारों लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं, ऐसे में एक औषधालय ऐसा भी है, जहां हर मर्ज का इलाज निशुल्क होता है। इस औषधालय में इलाज का सिलसिला आज से नहीं बल्कि पिछले 113 साल से चल रहा है।
झालरापाटन सिटी के दिगंबर जैन शांतिनाथ मंदिर के तत्वाधान में संचालित शांतिनाथ दिगंबर जैन औषधालय में अनवरत रूप से लोगों की बीमारी का इलाज आयुर्वेद पद्धति से किया जा रहा है। 113 साल पहले बने इस औषधालय में आज भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग निशुल्क इलाज के लिए आते हैं। इस औषधालय की स्थापना 18 अप्रेल 1913 को हुई थी।
बाजार की दवाइयां नहीं देते
औषधालय की खासियत यह है कि यहां बाजार की दवाइयां नहीं दी जाती है। इसलिए मरीज पर किसी भी तरह का आर्थिक भार नहीं पड़ता। औषधालय का सारा खर्च शांतिनाथ मंदिर पंचायत ट्रस्ट वहन करती है। इसे सरकारी स्तर से किसी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती है।
दूर-दूर से इलाज के लिए आते हैं रोगी
औषधालय प्रभारी वैद्य महेश चंद शर्मा ने बताया कि औषधालय में इलाज के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, नई दिल्ली, कोलकाता और असम तक के रोगी आते हैं।
जड़ी बूटी से काढ़ा बनाकर लोगों को पिलाया
औषधालय प्रभारी ने बताया कि कोरोना काल में चले बीमारी के प्रकोप के दौरान कई लोगों की मृत्यु हो गई। उस समय स्थानीय लोगों को इस बीमारी से बचाने के लिए जागरुक लोगों ने विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटी से काढ़ा बनाकर लोगों को औषधालय में पिलाया।
नीम की चटनी
औषधालय की स्थापना से लेकर आज तक हर वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष एकम से तीन दिन तक यहां औषधि युक्त नीम की चटनी का निशुल्क वितरण किया जाता है। जिसे लेने के लिए दूर-दूर तक से लोग प्रतिदिन आते हैं। यह चटनी मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। जिससे इसका सेवन करने वाला व्यक्ति पूरे वर्ष निरोगी रहता है। औषधालय प्रभारी बताते हैं कि आयुर्वेदिक उपचार का मनुष्य के शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। यह लंबे समय तक चलता है, लेकिन बीमारी को जड़ मूल से समाप्त कर देता है। इसीलिए कई रोगी एलोपैथी से थक हार कर औषधालय में उपचार कराने के लिए आते हैं। पहले तो यहां पर गिने-चुने रोगी ही आते थे। अब तो यहां पर रोगियों की संख्या पहले से बढ़ गई है। जिसमें भी बुजुर्गों के साथ युवा पीढ़ी के बच्चे भी यहां से उपचार ले रहे हैं।
आयुर्वेद चिकित्सालय हमारा गौरव
औषधालय में कर्मचारियों की ओर से जड़ी-बूटियां के जरिए औषधि तैयार की जाती है। सेवाएं देने वाले वैद्य और आयुर्वेदिक दवाई तैयार करने वाले, दवा वितरित करने वाले कर्मचारियों को मानदेय शांतिनाथ मंदिर पंचायत ट्रस्ट की ओर से दिया जाता है। औषधालय प्रभारी बताते हैं कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति हमारे देश की चिकित्सा पद्धति है ये एलोपैथी से कम खर्चीली और ज्यादा विश्वसनीय है। उन्होंने बताया कि इस औषधालय में उनकी कई पीढ़ियां अपनी सेवाएं दे चुकी है।
कई राजनेता भी लाभान्वित
वैद्य शर्मा बताते हैं कि औषधालय से प्रतिमाह हजारों मरीजों का निशुल्क इलाज किया जाता है और स्थापना से लेकर अब तक तो लाखों मरीजों का उपचार किया जा चुका है। औषधालय से प्रतिदिन करीब 50 रोगियों का उपचार किया जाता है। यह औषधालय शुरू से ही अच्छे इलाज के लिए जाना जाता है। यहां पर शुद्ध आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की व्यवस्था है। पूर्व में राज्यपाल और केंद्र सरकार में मंत्री रहे प्रकाश चंद सेठी, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मामा सरदार अंग्रे, दिगंबर व श्वेतांबर जैन समाज के मुनियों के अलावा कई साधु संतों का उन्होंने उपचार किया है।
एक पारी में संचालित होता है औषधालय
शांतिनाथ औषधालय प्रतिदिन सुबह 7 से 11 बजे तक संचालित किया जाता है। इसमें सभी तरह की बीमारियों का इलाज निशुल्क किया जाता है।