डाइट में 16 व्याख्याता पद खाली, छात्र घंटों इंतजार कर लौट रहे मायूस

व्याख्याताओं के 18 पद स्वीकृत, पढ़ाई पर असर

dholpur. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) इन दिनों गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। हालात इतने चिंताजनक हैं कि यहां पढ़ाई करने आने वाले छात्र-छात्राओं को नियमित कक्षाएं तक नसीब नहीं हो पा रही हैं। संस्थान में व्याख्याताओं के 18 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 2 ही व्याख्याता कार्यरत हैं, जबकि 16 पद लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं। इस बड़ी कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और संस्थान की व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है।

डाइट में एसटीसी (शिक्षक प्रशिक्षण) के छात्र रोज उम्मीद लेकर पढऩे आते हैं, लेकिन उन्हें कक्षाओं के बजाय इंतजार ही करना पड़ता है। कई बार छात्र-छात्राएं 2 से 3 घंटे तक बैठकर शिक्षकों का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन जब कोई कक्षा नहीं लगती, तो वे मायूस होकर वापस लौट जाते हैं। इससे उनके भविष्य पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

सिर्फ व्याख्याताओं की ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण पद भी खाली पड़े हैं। संस्थान में पुस्तकालयाध्यक्ष और शारीरिक शिक्षा शिक्षक का पद भी रिक्त हैं, जिससे शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 5 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल एक महिला कर्मचारी ही कार्यरत है, जो अनुकंपा नियुक्ति के तहत लगी हुई है। बाकी 4 पद खाली होने से संस्थान की रोजमर्रा की व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

संस्थान का संचालन बना चुनौती

कार्यवाहक प्रधानाचार्य नीरज शर्मा के अनुसार, स्टाफ की कमी के चलते न केवल नियमित कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े कार्यों को पूरा करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सीमित स्टाफ के भरोसे पूरे संस्थान का संचालन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

छात्रों और अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि अगर समय रहते खाली पदों को नहीं भरा गयाए तो बच्चों की शिक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। डाइट जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में इस तरह की लापरवाही शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

समाधान की उम्मीद स्टाफ भर्ती से ही

डाइट प्रशासन का मानना है कि जब तक सभी पदों पर नियुक्तियां नहीं होंगी, तब तक शिक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकती। स्टाफ पूरा होने के बाद ही कक्षाएं नियमित और व्यवस्थित रूप से संचालित हो पाएंगी और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर कब ध्यान देता है और कब तक छात्रों को इस परेशानी से राहत मिलती है।