राजस्थान में BJP MLA के बेटे पर यौन शोषण का आरोप, SP से बोली पीड़िता- मिल रही जान से मारने की धमकी

राजसमंद। भीम विधायक हरिसिंह रावत के पुत्र रणजीत सिंह रावत एक बार फिर चर्चा में हैं। ब्यावर जिले की एक महिला ने राजसमंद एसपी हेमंत कलाल को परिवाद देकर रणजीत सिंह पर यौन शोषण, प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने एसपी को ज्ञापन के साथ कुछ साक्ष्य भी पेश किए हैं।

आरोप है कि रणजीत सिंह ने उसके जेवर, नकदी और पति की मौत के बाद मिली बीमा राशि हड़प ली। विरोध करने पर आरोपी की ओर से उसे और परिवार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। एसपी हेमंत कलाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भीम थाना पुलिस को तथ्यों की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

पीड़िता का आरोप-शादी का वादा कर 3 साल तक साथ रखा

पीड़िता ने दावा किया है कि वर्ष 2014 में उनकी मुलाकात आरोपी से हुई थी। उस समय आरोपी की पत्नी के जेल में होने से परिवार के सदस्यों ने ही विवाह का प्रस्ताव रखा था। पीड़िता का आरोप है कि रणजीत सिंह ने शादी का भरोसा देकर उसे अपने साथ रखा और 2014 से 2017 तक वे नंदावट स्थित मकान पर लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। जब पीड़िता ने विधिवत रूप से विवाह करने की बात कही तो आरोपी ने पहली पत्नी के आने पर तलाक दिलाने का झांसा दिया। पहली पत्नी के लौटने के बाद आरोपी ने दूरी बना ली। आपत्ति जताने पर मारपीट व बदसलूकी की।

राजनीतिक द्वेषता के चलते षड्यंत्र रचा गया: रणजीत सिंह

भाजपा नेता रणजीत सिंह रावत का कहना है कि मुझ पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद है। राजनीतिक द्वेषता के चलते षड्यंत्र रचा गया है। मैं इस महिला को नहीं जानता। पुलिस जांच में सच्चाई सामने आ ही जाएगी।

पहले भी विवाद के चलते चर्चा में रहे विधायक के पुत्र

भीम उपखंड मुख्यालय के बरतु क्षेत्र में इसी साल 8 मार्च की रात जेसीबी मशीन से तीन गरीब परिवारों के पक्के मकानों को ध्वस्त करने का मामला सामने आया था। इस मामले में 20 मार्च को नर्बदा देवी, गीता देवी और रघुवीर सिंह ने नंदावट निवासी विधायक हरि सिंह रावत के पुत्र रणजीत सिंह के खिलाफ भीम थाने में केस दर्ज करवाया था।

घटना के बाद पीड़ित परिवार की महिलाओं ने जिला पुलिस अधीक्षक से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि विधायक का बेटा पूर्व में भी मकान खाली करने और जमीन बेचने के लिए धमकाता रहा है। वर्ष 2016 में इस संबंध में भीम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन कथित राजनीतिक रसूख के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।