लाठी क्षेत्र में आवारा श्वानों से वन्यजीवों पर मंडरा रहा गंभीर खतरा

प्रकृति की गोद में विचरण करने वाले वन्यजीवों पर आवारा श्वानों का खतरा मंडरा रहा है। आए दिन श्वानों के हमले में वन्यजीवों की मौत हो रही है। क्षेत्र में चिंकारा हिरण, सांडा, लोमड़ी आदि पर श्वान हमला कर मौत के घाट उतार रहे है, जिनकी घटनाएं लगातार बढ़ रही है। यही नहीं राष्ट्रीय पक्षी मोर व राज्यपक्षी गोडावण पर भी खतरा मंडराने लगा है। दूसरी तरफ वन-विभाग की ओर से गश्त बढ़ाने और श्वानों को पकड़कर वन्यजीव क्षेत्र से दूर भिजवाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे वन्यजीवप्रेमियों में रोष बढ़ता जा रहा है।

गौरतलब है कि लाठी, धोलिया, खेतोलाई, भादरिया, गंगाराम की ढाणी, नेड़ान सहित आसपास का क्षेत्र वन्यजीव बाहुल्य है। यहां बढ़ रही आवारा श्वानों की संख्या ने चिंता बढ़ा दी है। श्वानों की संख्या अधिक होने से वन्यजीव अपने स्थायी आवास छोडऩे को मजबूर हो रहे है। क्षेत्र के चिंकारा, हिरण, मोर, गोडावण, सांडा, लोमड़ी आदि वन्यजीवों पर आए दिन श्वान हमला कर रहे है।

बढ़ती श्वानों की संख्या से चिंता

बीते एक दशक से चिंकारा, लोमड़ी, गोडावण आदि वन्यजीव श्वानों का शिकार हो रहे है, लेकिन अंकुश लगाने के लिए कोई कवायद नहीं की जा रही है। लगातार बढ़ रही आवारा श्वानों की संख्या चिंता का सबब बनने लगी है। बावजूद इसके वन विभाग की ओर से वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्रों में गश्त नहीं की जा रही है, जिससे वन्यजीवप्रेमी चिंतित है।

तीन माह में हुई घटनाएं

– 27 फरवरी गंगाराम की ढाणी के पास श्वानों के हमले में तीन हिरणों की मौत

– 4 मार्च धोलिया गांव के पास श्वानों के हमले में चिंकारा घायल

– 8 मार्च गंगाराम की ढाणी के पास श्वानों के हमले में चिंकारा घायल

– 31 मार्च श्वानों के हमले में नेड़ान गांव के पास चिंकारा घायल

– 4 अप्रेल गंगाराम की ढाणी के पास श्वानों के हमले में एक नीलगाय गंभीर घायल

– 8 अप्रेल को धोलिया गांव के पास श्वानों के हमले में चिंकारा हिरण की मौत

वन्यजीवों की हो रही मौत

क्षेत्र में आवारा श्वान वन्यजीवों पर हमले कर रहे है। लगातार हो रहे हमलों में वन्यजीवों की मौत हो रही है। जबकि जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं दे रहे है।

– अभिषेक विश्नोई, वन्यजीवप्रेमी, धोलिया

गंभीरता से लेने की जरुरत

क्षेत्र में श्वानों की तादाद लगातार बढ़ रही है। सर्वाधिक खतरा हिरणों को है। अब तक बड़ी संख्या में हिरण काल का ग्रास हो रहे है। क्षेत्र में गोडावण का भी डेरा है। जिन पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में जिम्मेदारों को इसे गंभीरता से लेने की जरुरत है।

– गौरीशंकर पूनिया, तहसील अध्यक्ष अखिल भारतीय जीव रक्षा, पोकरण