Dog Attack: बीकानेर में आवारा कुत्तों का आतंक, मासूम बच्चे को नोंच कर किया लहूलुहान, हालत गंभीर

नोखा। पांचू क्षेत्र में आवारा श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ये श्वान अब सिर्फ मवेशियों ही नहीं, बल्कि इंसानों पर भी हमला करने लगे हैं। रविवार को एक दर्दनाक घटना में आवारा श्वानों के झुंड ने एक मासूम बच्चे पर जानलेवा हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायल बच्चे को प्राथमिक उपचार के बाद बीकानेर के पीबीएम अस्पताल रेफर किया गया।

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ननिहाल आया था मासूम

जानकारी के अनुसार राजवीर पुत्र रामलाल डूडी इन दिनों अपने ननिहाल पांचू आया हुआ था। रविवार शाम को वह ढाणी के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान अचानक वहां आवारा श्वानों का एक झुंड पहुंच गया और उसने बच्चे पर हमला कर दिया। श्वानों ने उसे जमीन पर गिरा दिया और चेहरे सहित शरीर के कई हिस्सों पर गहरे घाव कर दिए। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर परिजन और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बड़ी मुश्किल से उसे श्वानों के चंगुल से छुड़ाया।

पीबीएम अस्पताल रेफर किया

घटना के बाद परिजन घायल बच्चे को लहूलुहान हालत में तुरंत पाचू के राजकीय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। फिलहाल बच्चे का उपचार जारी है और उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

ग्रामीणों में आक्रोश

इस घटना के बाद मासूम के परिजनों सहित पूरे गांव में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से आवारा श्वानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पहले भी कई मवेशियों पर हमले की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

ग्रामीणों ने बताया कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डरने लगे हैं। शाम के समय तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब श्वानों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

पत्रिका व्यू- अब तो जागो जिम्मेदारों

शहर और ग्रामीण क्षेत्र में आवारा कुत्तों की समस्या दिनों-दिन विकराल होती जा रही है। हिंसक कुत्तों के हमला करने की झकझोर देने वाली घटनाएं सामने आती रहती हैं। हर साल सैकड़ों लोगों को कुत्तों के काटने पर एंटी रेबिज इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। ऐसी घटनाओं के लिए शहरी क्षेत्र में स्थानीय निकाय नगर निगम व नगर पालिकाएं जिम्मेदार हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में कुत्तों पर नियंत्रण का कार्य ग्राम पंचायतों को करना होता है। परंतु निकाय और पंचायतें दोनों ही इस समस्या से मुंह मोड़े बैठी हैं। ऊपनी में चार साल के बालक को कुत्ते ने लहूलुहान किया तब हर कोई सिहर उठा। तब भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो इसके लिए ठोस कदम उठाने की बातें हुई, लेकिन डेढ़ महीना ही मुश्किल से बीता की एक और बालक फिर हिंसक कुत्तों का शिकार बन गया। अब भी प्रशासन नहीं जागा तो ऐसी घटनाएं फिर नहीं होगी इसकी कोई गारंटी नहीं ले सकता।